वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय तेज़ बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिका द्वारा आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने और संरक्षणवादी नीतियों को बढ़ावा देने के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है।
77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय आयोग के शीर्ष अधिकारियों का भारत आना इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 135 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी करीब 17% है, जबकि ईयू भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी एक प्रमुख स्रोत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए लागू होने के बाद यह व्यापार अगले कुछ वर्षों में 200 अरब डॉलर के आंकड़े को भी छू सकता है।
मुक्त व्यापार समझौते के तहत:
आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (ड्यूटी) घटाए जाते हैं
व्यापार से जुड़े गैर-शुल्क अवरोध कम होते हैं
निवेश, सेवाओं और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है
भारत-ईयू एफटीए से दोनों पक्षों को अपने-अपने उत्पादों के लिए बड़ा और स्थिर बाजार मिलेगा।
भारत मुख्य रूप से निम्न उत्पाद यूरोपीय संघ को निर्यात करता है—
पेट्रोलियम उत्पाद
भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% हिस्सा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में इन उत्पादों की मांग तेज़ी से बढ़ी है।
फार्मास्यूटिकल्स और रसायन
भारत की जेनेरिक दवाएं यूरोप में बड़ी मात्रा में जाती हैं। कुल निर्यात में हिस्सेदारी करीब 15%।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान
रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल
ऑटोमोबाइल पार्ट्स
भारत यूरोपीय संघ से मुख्य रूप से—
उन्नत मशीनरी और उपकरण
ऑटोमोबाइल और विमानन उत्पाद
केमिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज़
ग्रीन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी
का आयात करता है।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ से भारत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में ईयू के साथ एफटीए:
अमेरिका पर निर्भरता कम करेगा
भारतीय निर्यातकों को वैकल्पिक बड़ा बाजार देगा
वैश्विक व्यापार में भारत की सौदेबाजी की ताकत बढ़ाएगा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत के लिए “डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी” का अहम हिस्सा है।
एफटीए से भारत के कई प्रमुख सेक्टरों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है—
✔️ फार्मास्यूटिकल्स
✔️ टेक्सटाइल और गारमेंट्स
✔️ आईटी और डिजिटल सेवाएं
✔️ ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स
✔️ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
✔️ रिन्यूएबल एनर्जी
अनुमान है कि इससे भारत का निर्यात 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
ईयू के लिए यह समझौता:
भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में मजबूत पकड़
चीन पर निर्भरता कम करने का अवसर
भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर में निवेश
का रास्ता खोलेगा।
हालांकि समझौता ऐतिहासिक माना जा रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं—
कृषि और डेयरी उत्पादों पर भारत की सुरक्षा
डेटा प्रोटेक्शन और बौद्धिक संपदा अधिकार
यूरोपीय संघ के कड़े पर्यावरण और कार्बन मानक
इन मुद्दों पर संतुलन बनाना समझौते की सफलता के लिए जरूरी होगा।