वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत यह समझौता सोमवार को सार्वजनिक किया गया था। इसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को 13.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य करेगा, जबकि देश के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को मौजूदा सुरक्षा कवच के तहत बनाए रखने की अनुमति दी गई है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने एक साक्षात्कार में बताया कि अमेरिका भारत के कुछ संरक्षित कृषि क्षेत्रों में बाजार पहुंच को लेकर बातचीत जारी रखेगा। हालांकि मेवे, शराब, स्पिरिट, फल और सब्जियों जैसी कई श्रेणियों में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ शून्य करने पर सहमति जताई है।
ग्रीर ने स्पष्ट किया कि चावल, बीफ, सोयाबीन, चीनी और डेयरी उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। ये वही क्षेत्र हैं जिन्हें भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते में भी शामिल नहीं किया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई तकनीकी व्यापार बाधाओं पर भी सहमति बनी है, जहां भारत ने अब तक अमेरिकी मानकों को स्वीकार नहीं किया था।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के अनुसार, अमेरिकी मानकों की मान्यता के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसके तहत भारत को अपनी आंतरिक राजनीतिक और नियामक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। रूसी तेल आयात को लेकर पूछे गए सवाल पर ग्रीर ने कहा कि भारत पिछले वर्ष के अंत से ही रूस से तेल आयात कम करने पर काम कर रहा है और ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका व वेनेजुएला जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि टैरिफ में बदलाव लागू होने की कोई समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। ग्रीर ने कहा कि समझौते को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए एक “रोमांचक अवसर” बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत पर कुछ टैरिफ (लगभग 18 प्रतिशत) बनाए रखेगा, क्योंकि अमेरिका को भारत के साथ बड़े व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है।
इस बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों से रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने भारत पर लगाए गए टैरिफ को बदलती वैश्विक परिस्थितियों का उदाहरण बताते हुए कहा कि भारत अब रूस से पहले की तुलना में काफी कम तेल खरीद रहा है।
इस व्यापार समझौते के बाद भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जिन पर अमेरिका ने सबसे कम आयात शुल्क लगाए हैं। भारत पर लगाए गए टैरिफ चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं।
भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ दरें अब अमेरिका के करीबी सहयोगी देशों के स्तर के आसपास हैं। इनमें ब्रिटेन (10 प्रतिशत), यूरोपीय संघ (15 प्रतिशत), स्विट्जरलैंड (15 प्रतिशत), जापान (15 प्रतिशत) और दक्षिण कोरिया (15 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं ब्राजील (50 प्रतिशत), म्यांमार (40 प्रतिशत), लाओस (40 प्रतिशत), चीन (37 प्रतिशत) और दक्षिण अफ्रीका (30 प्रतिशत) उन देशों में हैं, जिन पर अमेरिका ने सबसे अधिक टैरिफ लगाए हैं।