नई दिल्ली – भारत और चीन के बीच संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम अगले हफ्ते उठने वाला है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी आगामी सप्ताह भारत का दौरा करेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक सीमा विवाद सहित कई अहम मुद्दों पर केंद्रित होगी।
वांग यी और अजित डोभाल, दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के रूप में सीमा विवाद से जुड़ी वार्ताओं का नेतृत्व करते हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। पिछले वर्ष लद्दाख में गतिरोध के आंशिक समाधान के लिए समझौता हुआ था, जबकि इस साल चीन ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया और भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीज़ा जारी करना पुनः प्रारंभ किया।
इस राजनयिक सक्रियता का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। वहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने की संभावना है। पिछली बार दोनों नेताओं की भेंट 2024 में कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जिसे संबंधों को स्थिर करने की दिशा में अहम कदम माना गया था।
भारत और चीन के बीच बढ़ते सहयोग के संकेत के रूप में अगले महीने से सीधी यात्री उड़ानें फिर से शुरू होने वाली हैं। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 से ये सेवाएं बंद थीं। नई उड़ान सेवाएं दोनों देशों के बीच यात्रा और व्यावसायिक संपर्क को गति देंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वांग यी की यह यात्रा और डोभाल के साथ होने वाली वार्ता, दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इसके साथ ही, पीएम मोदी का चीन दौरा और हवाई सेवाओं की बहाली, भारत-चीन संबंधों में नई ऊर्जा का संकेत दे रहे हैं।