भारत-चीन वार्ता : सीमा विवाद, आतंकवाद और सहयोग पर बनी सहमति

भारत-चीन वार्ता : सीमा विवाद, आतंकवाद और सहयोग पर बनी सहमति

तियानजिन (चीन)। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रविवार को हुई द्विपक्षीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बैठक में सीमा विवाद, आतंकवाद से मुकाबला और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने जैसे विषयों पर दोनों नेताओं के बीच सहमति बनी।


सीमा विवाद पर बातचीत

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन सीमा विवाद पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष हुई सैन्य वापसी और उसके बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में बनी शांति का जिक्र किया। सहमति बनी कि मौजूदा तंत्रों का उपयोग कर सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखा जाएगा ताकि द्विपक्षीय संबंधों में किसी प्रकार की बाधा न आए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि दोनों देशों के संबंधों के सहज और निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता जरूरी है।


शी जिनपिंग के चार सुझाव

विदेश सचिव के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए चार अहम सुझाव रखे –

  1. रणनीतिक संचार को बढ़ावा देकर आपसी विश्वास मजबूत करना।

  2. आदान-प्रदान और सहयोग का विस्तार करना।

  3. पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करना।

  4. एक-दूसरे की चिंताओं को ध्यान में रखना।

प्रधानमंत्री मोदी ने इन सुझावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया।


भारत-चीन साझेदारी पर जोर

बैठक में दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और चीन को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार की भूमिका निभानी चाहिए। विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों ने तय किया कि मतभेदों को विवाद का रूप न दिया जाए। स्थिर और मैत्रीपूर्ण रिश्ते न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि 2.8 अरब लोगों के हित में होंगे।


BRICS सम्मेलन का निमंत्रण

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया। चीनी राष्ट्रपति ने इसे स्वीकार करते हुए भारत की BRICS अध्यक्षता को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।


हालिया बैठकों की समीक्षा

यह बैठक एक साल से कम समय में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात रही। पिछली मुलाकात पिछले वर्ष अक्टूबर में कज़ान (रूस) में हुई थी, जहां द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए कई रणनीतिक दिशा-निर्देश तय किए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार की बैठक को “सार्थक” बताते हुए कहा कि कज़ान बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है।


👉 इस तरह तियानजिन में हुई मोदी-जिनपिंग की वार्ता ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा है।