सिडनी, 29 जनवरी 2026।
ऑस्ट्रेलिया में महंगाई एक बार फिर चिंता का विषय बनती जा रही है। ताज़ा आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार उपभोक्ता कीमतों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे ब्याज दरों में दोबारा वृद्धि की आशंका तेज़ हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ेगा और 2026 में घरेलू खर्च हज़ारों डॉलर तक बढ़ सकता है।
ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (ABS) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर तक के 12 महीनों में महंगाई दर बढ़कर 3.8 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 3.4 प्रतिशत थी। यह बढ़ोतरी बाज़ार के अनुमानों से अधिक मानी जा रही है।
उपभोक्ता वित्त विशेषज्ञ जोएल गिब्सन ने चेतावनी दी है कि देश एक बार फिर 2022 जैसी महंगाई की स्थिति की ओर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि हाल के महीनों में जो थोड़ी राहत मिली थी, वह अब खत्म होती दिख रही है।
गिब्सन के अनुसार, “ब्याज दरों में कटौती का दौर अब समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में दरों में बढ़ोतरी भी संभव है। इसका मतलब है कि चाहे किसी के पास होम लोन हो या नहीं, जीवनयापन की लागत बढ़ना तय है।”
रिपोर्ट के अनुसार वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई है। खासतौर पर बिजली की कीमतों में 21.5 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण सरकारी सब्सिडी और रिबेट्स का खत्म होना है। वहीं मांस की कीमतों में भी दोहरे अंकों में वृद्धि देखी गई।
सेवाओं की महंगाई दर भी बढ़कर 4.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। घरेलू हवाई यात्रा की कीमतों में 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसका एक कारण एशेज क्रिकेट सीरीज़ भी बताया जा रहा है। इसके अलावा किराए में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि ने किरायेदारों की परेशानी और बढ़ा दी है।
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के लिए अहम मानी जाने वाली ‘ट्रिम्ड मीन’ महंगाई दर भी दिसंबर तिमाही में 0.9 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसके साथ ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो औसत ऑस्ट्रेलियाई परिवार को इस साल करीब 2,192 डॉलर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
गिब्सन ने कहा कि यह महंगाई ऐसी चीज़ों पर असर डाल रही है जिन्हें टालना संभव नहीं है, जैसे बिजली बिल, किराया और होम लोन की किश्तें। उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि छोटे खर्चों पर नहीं, बल्कि बीमा, बिजली योजनाओं और बड़ी खरीदारी पर समझदारी से फैसले लेने की ज़रूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के बाद के वर्षों में जैसे ऑस्ट्रेलियाई परिवारों को बचत के नए तरीके अपनाने पड़े थे, वैसी ही सतर्कता एक बार फिर ज़रूरी हो गई है।