तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान में राजनीतिक और सामाजिक संकट तेजी से गहराता जा रहा है। देश के कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी बीच ईरान के निर्वासित युवराज Reza Pahlavi ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा है कि हालात बेहद नाजुक हैं और “एक घंटे के भीतर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं।”
रजा पहलवी ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की जनता दमन, महंगाई और राजनीतिक आज़ादी के अभाव से त्रस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा बलों की सख्ती और संचार माध्यमों पर रोक के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पहलवी के अनुसार, यह समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए केवल बयान देने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का है।
ईरान सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए कई प्रांतों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बाधित कर दी हैं। राजधानी तेहरान सहित प्रमुख शहरों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई हैं, जिनमें लोगों के घायल होने की खबरें हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि ये प्रदर्शन “विदेशी ताकतों के उकसावे” का नतीजा हैं, जबकि प्रदर्शनकारी इसे वर्षों से चले आ रहे आर्थिक संकट, बेरोज़गारी और राजनीतिक दमन का स्वाभाविक विस्फोट बता रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि देश की स्थिरता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी मीडिया में दिए गए संदेशों में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई है कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रजा पहलवी ने ट्रंप से आग्रह किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरानी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाएं ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकी जा सके। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी सक्रिय नहीं हुआ, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संकट केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव के बीच ईरान की अस्थिरता क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल ईरान में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर सरकार सख्ती के जरिए नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनता का आक्रोश थमता नहीं दिख रहा। आने वाले घंटों और दिनों में यह तय होगा कि यह विरोध आंदोलन किस दिशा में जाता है—संवाद की ओर या टकराव की ओर।