नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा का उल्लंघन किया है और सरकार का भरोसा खो दिया है। चिदंबरम का यह बयान देश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, “यह साफ है कि उपराष्ट्रपति ने अपने संवैधानिक पद की मर्यादा को ताक पर रखकर ऐसे बयान दिए हैं जो न केवल पक्षपातपूर्ण हैं बल्कि सत्ताधारी दल के राजनीतिक एजेंडे को भी बढ़ावा देते हैं। ऐसे आचरण से न केवल उनका पद कमजोर हुआ है, बल्कि उन्होंने सरकार का विश्वास भी खो दिया है।”
चिदंबरम ने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति को यह याद रखना चाहिए कि वे राज्यसभा के सभापति होने के साथ-साथ एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के प्रतिनिधि हैं, न कि किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर उपराष्ट्रपति खुद सरकार की आलोचना करने वालों को निशाने पर लेंगे, तो फिर लोकतंत्र में संतुलन और निष्पक्षता कैसे बनी रहेगी? उन्होंने मांग की कि राष्ट्रपति को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में उपराष्ट्रपति धनखड़ द्वारा दिए गए कुछ राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई थी। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि उपराष्ट्रपति का बयान पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिदंबरम का यह बयान विपक्ष की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले सरकार पर दबाव बनाने का काम करेगा।
अब यह देखना होगा कि उपराष्ट्रपति कार्यालय इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है और सत्तापक्ष कांग्रेस के आरोपों का क्या जवाब देता है।