वीर सैनिकों को न्यायिक ढाल: जस्टिस सूर्यकांत ने लॉन्च की 'वीर परिवार सहायता योजना'

वीर सैनिकों को न्यायिक ढाल: जस्टिस सूर्यकांत ने लॉन्च की 'वीर परिवार सहायता योजना'

कारगिल विजय दिवस के गौरवमयी अवसर पर, भारत के भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के जवानों एवं उनके परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की। श्रीनगर में आयोजित समारोह में उन्होंने 'वीर परिवार सहायता योजना 2025' का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य है – देश की सेवा में लगे जवानों और उनके परिजनों को मुफ्त, शीघ्र और प्रभावी कानूनी सहायता प्रदान करना।

ऑपरेशन सिंदूर से मिली प्रेरणा

NDTV को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि इस योजना की प्रेरणा हाल ही में संपन्न 'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली, जहां सेना ने अनुकरणीय बहादुरी और सेवा भावना का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, "जब सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे होते हैं, तब उन्हें अपने घर-परिवार की कानूनी चिंताओं में उलझना नहीं पड़ना चाहिए। यही सोच वीर परिवार सहायता योजना के पीछे है।"

कानूनी सुरक्षा, घर बैठे

जस्टिस सूर्यकांत, जो फिलहाल नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं, ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल सैनिकों के लिए नहीं, बल्कि उनके परिवारों—माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों—की भी सुरक्षा और सहूलियत सुनिश्चित करती है। अब कोई भी कानूनी विवाद या चिंता जवान के ड्यूटी पर असर नहीं डालेगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया, "बॉर्डर पर तैनात जवान घर की चिंता न करें। अब न्यायपालिका उनके साथ खड़ी है।"

देश के कोने-कोने में कानूनी सेवा

NALSA की यह योजना राष्ट्रीय, राज्य, जिला और तालुका स्तर पर लागू की जाएगी ताकि देश के हर कोने में तैनात जवानों और उनके परिवारों को एक समान, सुलभ और असरदार कानूनी सेवा मिल सके। इससे जुड़े वकील व पैरालीगल वॉलंटियर्स निःशुल्क सहायता देंगे और जरूरी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

क्यों है यह योजना खास?

  • पूरी तरह निःशुल्क कानूनी सहायता

  • सैनिकों और अर्धसैनिक बलों – दोनों के लिए लागू

  • घर पर रह रहे परिजनों को विशेष प्राथमिकता

  • मुकदमों, दस्तावेजी विवाद, घरेलू मामलों आदि में त्वरित सहायता

  • भाषा, स्थान या साधनों की कोई बाध्यता नहीं

24 नवंबर को संभालेंगे CJI का पद

जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। न्यायपालिका में उनके इस कदम को एक संवेदनशील, दूरदर्शी और राष्ट्रसेवक नेतृत्व का प्रतीक माना जा रहा है।