करप्ट नेताओं को पार्टी में शामिल कराने वालों पर केजरीवाल का पलटवार

करप्ट नेताओं को पार्टी में शामिल कराने वालों पर केजरीवाल का पलटवार

नई दिल्ली।
गृहमंत्री अमित शाह के ताजा बयान पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखा पलटवार किया है। अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री पांच साल से अधिक की सजा वाले मामले में जेल जाते हैं और 30 दिन के भीतर जमानत नहीं मिलती, तो उन्हें पद छोड़ना होगा। इसके जवाब में केजरीवाल ने सवाल उठाया है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों वाले नेताओं को पार्टी में शामिल कर मंत्री या मुख्यमंत्री बनाने वालों को कितनी सजा मिलनी चाहिए।


जेल से सरकार चलाने का जिक्र

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “भ्रष्टाचारियों को पार्टी में शामिल कराने वाले प्रधानमंत्री और मंत्रियों को इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए?” उन्होंने यह भी पूछा कि यदि किसी पर झूठा केस बनाकर जेल भेजा जाए और बाद में वह बरी हो जाए, तो ऐसे झूठे आरोप लगाने वाले मंत्री को क्या सजा मिलनी चाहिए।

अपने एक अन्य पोस्ट में केजरीवाल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की साजिश के तहत उन्हें झूठे मामले में जेल भेजा गया, जहां से उन्होंने 160 दिन तक सरकार चलाई। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात महीनों में बीजेपी की दिल्ली सरकार ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि लोग आज “जेल से चलाई गई सरकार” को याद कर रहे हैं।


अमित शाह का बयान

दरअसल, अमित शाह ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि “जिन पर भ्रष्टाचार या पांच साल से ज्यादा की सजा वाले आरोप हैं, ऐसे मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जेल से सरकार नहीं चला सकते।” उन्होंने यह भी बताया कि जब मामला हाईकोर्ट में गया था, तो अदालत ने कहा था कि नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए, हालांकि मौजूदा कानून में उन्हें हटाने का प्रावधान नहीं है।


संसद में पेश हुआ 130वां संशोधन

गृहमंत्री ने मानसून सत्र के दौरान संविधान का 130वां संशोधन पेश किया। इस बिल में प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री अगर गंभीर आरोप में गिरफ्तार होता है और 30 दिन तक उसे जमानत नहीं मिलती, तो वह अपने पद से स्वतः हट जाएगा। यह बिल फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है, जहां विपक्ष इसका कड़ा विरोध कर रहा है।


👉 यह मामला अब सियासी तकरार का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ बीजेपी इसे नैतिकता और पारदर्शिता से जोड़ रही है, वहीं अरविंद केजरीवाल भ्रष्ट नेताओं को शामिल कराने के आरोपों पर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं।