मेलबर्न में रह रहे कोरियाई परिवार पर निर्वासन का खतरा, वीज़ा 'गलतफहमी' के कारण फंसा मामला

मेलबर्न में रह रहे कोरियाई परिवार पर निर्वासन का खतरा, वीज़ा 'गलतफहमी' के कारण फंसा मामला

मेलबर्न में पिछले 17 वर्षों से रह रही एक कोरियाई मूल की लड़की और उसका परिवार निर्वासन की तलवार के नीचे है। 20 वर्षीय सोफिया ली, जो ऑस्ट्रेलिया में नर्स बनने की पढ़ाई कर रही हैं, अब अपने परिवार के साथ दक्षिण कोरिया वापस भेजे जाने के खतरे से जूझ रही हैं—वह भी एक 'गलतफहमी' के चलते।

सोफिया का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी ऑस्ट्रेलिया में बिताई है और यहीं की संस्कृति और मूल्यों के साथ पली-बढ़ी हैं। “मैंने अपनी पूरी जिंदगी ऑस्ट्रेलिया में जी है, यहां के मूल्यों के साथ बड़ी हुई हूं और यहीं अपने भविष्य की योजना बनाई थी,” सोफिया ने 9न्यूज़ से कहा।

वीज़ा में ‘गलतफहमी’ बनी मुसीबत

ली-पार्क परिवार को 2019 में स्किल्ड रीजनल वीज़ा (Subclass 887) देने से इनकार कर दिया गया था। यह वीज़ा उन लोगों के लिए है जो क्षेत्रीय ऑस्ट्रेलिया में कम से कम दो साल रहे हों और 12 महीने का पूर्णकालिक कार्य अनुभव प्राप्त कर चुके हों।

परिवार का दावा है कि सोफिया की मां सुमनी ली ने मेलबर्न में पूर्णकालिक एंड-ऑफ-लीज़ क्लीनिंग बिजनेस के जरिए यह शर्त पूरी की थी, लेकिन विभाग को यह मान्य नहीं हुआ। भाषा की बाधा और अनुवाद की त्रुटियों के कारण उनके माता-पिता अधिकारियों को सटीक जानकारी नहीं दे सके।

विभाग से नहीं मिला लिखित उत्तर

सोफिया का कहना है कि वीज़ा अधिकारी ने कभी लिखित निर्णय नहीं दिया, जिससे परिवार यह समझ ही नहीं पाया कि आवेदन क्यों अस्वीकार हुआ। उन्होंने अब उस मौखिक निर्णय की ऑडियो रिकॉर्डिंग मांगी है। उनका मानना है कि गलतफहमी और दस्तावेज़ी त्रुटियों के चलते यह भ्रम हुआ कि उनकी मां पूर्णकालिक रूप से कार्यरत नहीं थीं।

अपील बार-बार खारिज

परिवार ने आवश्यक सबूत और अतिरिक्त दस्तावेज़ भी पेश किए, लेकिन फिर भी उनका मामला सफल नहीं हुआ। प्रशासनिक अपील न्यायाधिकरण (AAT) ने उनकी अपील को कई बार खारिज कर दिया।

इस बीच, सोफिया को अपनी पढ़ाई भी रोकनी पड़ी है। उन्होंने स्कॉलरशिप पर नर्सिंग शुरू की थी लेकिन अब वीज़ा संकट के कारण उनका भविष्य अधर में है।