ऑस्ट्रेलिया की लेबर सरकार फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देने के एक कदम और करीब आ गई है, क्योंकि प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है कि वे ब्रिटेन जैसे देशों के साथ कदमताल करें, जिन्होंने हाल ही में फिलिस्तीन को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया तेज की है।
हाल ही में अल्बनीज़ ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का रुख दो-राष्ट्र समाधान के पक्ष में है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि हमास जैसे चरमपंथी संगठन को गाज़ा या फिलिस्तीन की किसी भी भावी सरकार में कोई भूमिका नहीं मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब यहूदी समुदाय के नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने इज़राइल की सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया की अटूट प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऑस्ट्रेलिया की किसी भी मान्यता प्रक्रिया में चरमपंथ और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख बना रहेगा।
लेबर पार्टी के अंदर और बाहर से सांसदों का एक वर्ग फिलिस्तीन को मान्यता देने के पक्ष में है, यह मानते हुए कि इससे पश्चिम एशिया में न्याय और शांति की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है।
ब्रिटेन, आयरलैंड और स्पेन जैसे देशों ने हाल ही में फिलिस्तीन को राज्य के रूप में मान्यता देने की पहल की है, जिससे ऑस्ट्रेलिया पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है।
फिलहाल, प्रधानमंत्री अल्बनीज़ संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं—एक ओर वे यहूदी समुदाय की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कदम मिलाने का दबाव भी महसूस कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि ऑस्ट्रेलिया आने वाले महीनों में फिलिस्तीन को लेकर क्या आधिकारिक नीति अपनाता है।