लेबर सरकार आगामी मई बजट में कर प्रणाली में बड़े सुधारों की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में सरकार पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन टैक्स) में दी जा रही मौजूदा रियायतों को सीमित करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम बढ़ते सरकारी खर्च और राजस्व आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था के तहत संपत्ति, शेयर और अन्य दीर्घकालिक निवेशों पर मिलने वाली कर छूट को कम करने का विकल्प बजट प्रस्तावों में शामिल है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो निवेश से होने वाले मुनाफे पर कर बोझ बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों और संपत्ति बाजार पर असर पड़ने की संभावना है।
सरकार का तर्क है कि मौजूदा कर ढांचा अमीर वर्ग को अपेक्षाकृत अधिक लाभ पहुंचाता है, जबकि आम करदाताओं पर बोझ बना रहता है। ऐसे में कर प्रणाली को अधिक संतुलित और न्यायसंगत बनाने के लिए पूंजीगत लाभ कर में सुधार आवश्यक है। इसके साथ ही सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते खर्च के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना चाहती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि पूंजीगत लाभ कर में बदलाव से निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है और रियल एस्टेट तथा शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे सरकार को स्थायी राजस्व मिलेगा और कर असमानता कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और मई बजट से पहले विभिन्न उद्योग संगठनों, विशेषज्ञों और हितधारकों से व्यापक परामर्श किया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि कर सुधारों की दिशा में सरकार कौन-सा रास्ता अपनाती है।