ऑस्ट्रेलिया में श्रमिकों के लिए एक बड़ा फैसला हुआ है। लेबर सरकार ने नया कानून पास कराया है, जिसके तहत अब नियोक्ता (employers) कर्मचारियों की पेनल्टी दरें और ओवरटाइम भत्ते घटा नहीं सकेंगे।
नई व्यवस्था के मुताबिक फेयर वर्क कमीशन (Fair Work Commission) के तहत होने वाली अवॉर्ड नेगोशिएशन में अब यह साफ रहेगा कि ओवरटाइम, पब्लिक हॉलीडे, वीकेंड और शाम की शिफ्ट पर मिलने वाले अतिरिक्त भत्तों में किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी।
इससे खासकर रिटेल, बैंकिंग, एडमिन और फाइनेंस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को फायदा होगा, जिन्हें अपनी आय का बड़ा हिस्सा पेनल्टी दरों से मिलता है।
वर्कप्लेस रिलेशन मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने कहा:
“अगर कोई ऑस्ट्रेलियाई अपने परिवार से समय निकालकर छुट्टियों या वीकेंड में काम करता है, तो उसे उसका उचित मुआवज़ा मिलना ही चाहिए। पेनल्टी और ओवरटाइम दरें कोई बोनस नहीं, बल्कि मूल अधिकार हैं।”
वहीं, विपक्षी पार्टी कोएलिशन ने इसे छोटे व्यवसायों पर बोझ डालने वाला कदम बताया। कोएलिशन के प्रवक्ता टिम विल्सन ने कहा कि सरकार बिना पूरी तैयारी के कानून लाई है और इससे छोटे व्यवसायों पर असर पड़ सकता है।
बिज़नेस काउंसिल ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने भी चेतावनी दी कि यह "लोकलुभावन नीति" कंपनियों की लागत बढ़ाएगी और संभव है कि इसका बोझ ग्राहकों पर डाला जाए।
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियन्स (ACTU) ने इस फैसले का स्वागत किया। ACTU की महासचिव सैली मैकमैनस ने कहा कि इन कानूनों के बिना, लाखों कर्मचारियों को हर साल हज़ारों डॉलर का नुकसान हो सकता था।
उन्होंने कहा, “यह कानून सुनिश्चित करेगा कि नियोक्ता पेनल्टी दरों को घटाकर कर्मचारियों की आय कम करने की दौड़ में शामिल न हों।”