सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): हाल ही में एक नया पेरेंटिंग ट्रेंड ऑस्ट्रेलिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे “FAFO पेरेंटिंग” कहा जा रहा है। यह ट्रेंड बच्चों को सख़्ती से नहीं बल्कि अनुभव और परिणामों से सिखाने पर ज़ोर देता है।
FAFO का मतलब है – “Fool Around and Find Out”। हालांकि इसका शॉर्ट-फॉर्म थोड़ा असभ्य या ‘रूखा’ लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की सोच गहरी और व्यावहारिक है। माता-पिता इसमें बच्चों को बार-बार समझाने या डाँटने के बजाय उन्हें उनके फैसलों के नतीजे अनुभव करने देते हैं।
इस पद्धति में अगर बच्चा कोई गलती करता है या बार-बार चेतावनी के बावजूद जोखिम उठाता है, तो माता-पिता तुरंत रोकते नहीं, बल्कि उसे परिणाम झेलने देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा ठंडी हवा में बिना जैकेट बाहर जाने की जिद करता है, तो उसे थोड़ी देर के लिए बाहर जाने दिया जाता है ताकि वह खुद ठंड महसूस कर सके और अगली बार अपनी सीख ले।
ऑस्ट्रेलिया में इस ट्रेंड को अपनाने वाले कई परिवारों का कहना है कि इससे बच्चों में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ती है, साथ ही माता-पिता का तनाव भी घटता है। लगातार समझाने या गुस्सा करने की बजाय बच्चे खुद अपने अनुभव से समझ जाते हैं कि कौन-सा व्यवहार सही है और कौन-सा गलत।
दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड तब और चर्चा में आया जब टेलर स्विफ्ट और ट्रैविस केल्स (NFL स्टार) से जुड़े परिवार के एक सदस्य ने इसे अपनाने की बात सार्वजनिक रूप से कही। इसके बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और कई पैरेंटिंग फोरम्स पर चर्चा का विषय बन गया।
भारत में भी बच्चों की परवरिश में माता-पिता अक्सर बहुत ज़्यादा दखल देते हैं। ऐसे में FAFO पेरेंटिंग का संदेश यह है कि बच्चों को हर बार बचाने की बजाय कभी-कभी उन्हें अपनी गलती से सीखने देना ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है।
👉 संक्षेप में कहा जाए तो, “FAFO पेरेंटिंग” बच्चों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों का सामना करना सिखाती है और माता-पिता को अनावश्यक तनाव से मुक्ति देती है।