कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख विपक्षी पार्टी लिबरल पार्टी के भीतर आव्रजन (माइग्रेशन) नीति को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता Sussan Ley की कथित रूप से लीक हुई एक योजना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस प्रस्ताव में आतंकवाद प्रभावित या आतंक नियंत्रित क्षेत्रों से आने वाले प्रवासियों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब दस्तावेज़ में शीर्ष पर नाम दर्ज होने के बावजूद लिबरल सीनेटर Paul Scarr ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने इस योजना पर कभी सहमति नहीं दी।
लीक दस्तावेज़ के अनुसार, प्रस्ताव में उन क्षेत्रों से प्रवास पर अस्थायी या पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है, जहाँ आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं या जिन पर उनका नियंत्रण है। योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देना बताया गया है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसी नीति लागू करने से शरणार्थियों और मानवीय आधार पर आने वाले लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी क्षेत्र विशेष पर सामूहिक प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और मानवाधिकार संधियों के अनुरूप होना चाहिए।
सीनेटर पॉल स्कैर ने स्पष्ट किया कि:
“मैंने इस दस्तावेज़ को अंतिम रूप में स्वीकृति नहीं दी है। इस प्रस्ताव पर मेरी औपचारिक सहमति नहीं ली गई।”
उनके इस बयान से पार्टी के भीतर नीति निर्माण की प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी वरिष्ठ सांसद का नाम उनकी सहमति के बिना शामिल किया गया है, तो यह आंतरिक समन्वय की कमी को दर्शाता है।
लिबरल पार्टी की वरिष्ठ नेता सुसान ले, जो पहले भी आव्रजन और सामाजिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं, इस योजना के मसौदे से जुड़ी बताई जा रही हैं। हालांकि, इस विवाद के बाद उनकी ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय से जुड़े संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। ‘लिटिल इंडिया ऑस्ट्रेलिया’ के अध्यक्ष गुरमीत सिंह तुली ने कहा कि सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी नीति को संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण से लागू किया जाना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। आने वाले चुनावों से पहले लिबरल पार्टी अपनी नीतियों को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि:
यदि पार्टी के भीतर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे, तो इससे उसकी चुनावी रणनीति कमजोर हो सकती है।
दूसरी ओर, सख्त आव्रजन नीति का समर्थन करने वाला मतदाता वर्ग इसे सकारात्मक कदम मान सकता है।