कभी सिंगूर में किया था आंदोलन, अब टाटा से बढ़ी नजदीकी: ममता बनर्जी की चंद्रशेखरन से ऐतिहासिक मुलाकात

कभी सिंगूर में किया था आंदोलन, अब टाटा से बढ़ी नजदीकी: ममता बनर्जी की चंद्रशेखरन से ऐतिहासिक मुलाकात

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच बुधवार को कोलकाता में एक अहम और ऐतिहासिक मुलाकात हुई। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि ममता बनर्जी ने कभी टाटा मोटर्स के सिंगूर प्रोजेक्ट के खिलाफ जोरदार आंदोलन छेड़ा था। अब लगभग दो दशक बाद, यही टाटा समूह और ममता बनर्जी नए रिश्तों की शुरुआत की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।

20 साल बाद नए युग की शुरुआत

करीब 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका था जब ममता बनर्जी और टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच औपचारिक बातचीत हुई। बैठक को ‘रचनात्मक और सकारात्मक’ बताया गया है, जिसमें बंगाल में टाटा समूह की संभावित निवेश योजनाओं पर चर्चा हुई।

तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह बैठक “बंगाल में टाटा समूह की भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम” है।

सिंगूर आंदोलन: एक ऐतिहासिक मोड़

साल 2006 में जब टाटा मोटर्स ने सिंगूर में अपना कारखाना स्थापित करने की योजना बनाई थी, तब ममता बनर्जी ने किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था। उस समय राज्य में वामपंथी सरकार थी और ममता सड़कों से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे पर लड़ती रहीं।

सिंगूर आंदोलन और बाद में 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने ममता को बंगाल की सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इन आंदोलनों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया और 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी।

टाटा का बंगाल से गुजरात जाना

सिंगूर विवाद के चलते टाटा समूह ने 2008 में अपना नैनो प्रोजेक्ट बंगाल से गुजरात शिफ्ट कर दिया। उस समय रतन टाटा ने ममता बनर्जी को ‘ट्रिगर खींचने वाला’ बताया था, यानी उन्हें कंपनी के प्रोजेक्ट को राज्य से बाहर ले जाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था। जवाब में ममता ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण कहा था और खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार किया था।

अब भविष्य की ओर देखती साझेदारी

ममता बनर्जी और एन चंद्रशेखरन की ताजा मुलाकात को राजनीतिक और औद्योगिक विश्लेषक एक ‘नई शुरुआत’ के तौर पर देख रहे हैं। अगर टाटा समूह वास्तव में फिर से बंगाल में निवेश करता है, तो यह राज्य के औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों के लिहाज से बड़ा कदम होगा।

यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि अतीत की तल्खियों को पीछे छोड़कर बंगाल सरकार और टाटा समूह अब भविष्य की ओर देख रहे हैं।