वॉशिंगटन यात्रा पर मार्ल्स की बैठक को लेकर सियासी घमासान

वॉशिंगटन यात्रा पर मार्ल्स की बैठक को लेकर सियासी घमासान

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स की वॉशिंगटन यात्रा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से उनकी मुलाकात को लेकर पेंटागन के बयान ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी, जिससे संसद में सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

पेंटागन का यू-टर्न

पेंटागन ने पहले इस मुलाकात को “हैपनस्टेंस” यानी संयोगवश हुई बताकर विवाद को जन्म दिया। इसके बाद जब सवाल उठे तो सफाई दी गई कि यह बैठक तयशुदा और समन्वित थी। इसी विरोधाभास पर विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

संसद में तीखी नोकझोंक

संसद में विपक्षी नेता एंगस टेलर ने पूछा कि क्या यह वास्तव में बैठक थी या सिर्फ़ फोटो खिंचवाने का मौका। इस पर मार्ल्स ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष “कैप्टन कांस्पिरेसी” की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने भी विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सोच “फर्जी चंद्रमा लैंडिंग” जैसे षड्यंत्र सिद्धांतों से अलग नहीं है।

सरकार का बचाव, विपक्ष का हमला

मार्ल्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के रिश्ते दलगत राजनीति से ऊपर हैं और विपक्ष इस रिश्ते को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि असमंजस भरे बयानों ने ऑस्ट्रेलिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है।

दौरे की पृष्ठभूमि

मार्ल्स इस हफ्ते व्हाइट हाउस पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस से भी मुलाकात की। उनकी योजना थी कि वे रक्षा मंत्री हेगसेथ से भी आधिकारिक वार्ता करेंगे। लेकिन मुलाकात कई दिनों तक टलती रही और अंततः एक hastily arranged फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा करनी पड़ी।

इंस्टाग्राम पर तस्वीर साझा करते हुए मार्ल्स ने लिखा, “ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का गठबंधन गहरा और ऐतिहासिक है, जो साझा सहयोग पर आधारित है।”


👉 कुल मिलाकर, वॉशिंगटन यात्रा ने कूटनीतिक नतीजों से ज्यादा घरेलू राजनीति में बवाल मचाया है। सरकार इसे “बेतुका विवाद” कह रही है जबकि विपक्ष इसे “ऑस्ट्रेलिया की कूटनीतिक नाकामी” बताकर हमलावर है।