कैनबरा – ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विकलांगता बीमा योजना (NDIS) में बड़े बदलाव की घोषणा ने हजारों माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य और विकलांगता मंत्री मार्क बटलर ने इस सप्ताह नेशनल प्रेस क्लब में कहा कि सरकार एनडीआईएस को अधिक टिकाऊ बनाने और खर्चों पर नियंत्रण लाने के लिए सुधार कर रही है।
एनडीआईएस की मौजूदा व्यवस्था के तहत विकलांग बच्चों को थेरेपी, स्पीच, ऑक्यूपेशनल और अन्य विशेष सेवाओं में सरकार मदद देती थी। अब प्रस्तावित बदलावों के बाद कई सेवाओं को सीधे एनडीआईएस से हटाकर नई मेडिकेयर सेवाओं के तहत लाने की योजना है।
सरकार का दावा है कि इससे बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी और एनडीआईएस पर वित्तीय दबाव कम होगा।
विशेषज्ञों और परिवारों का कहना है कि इन सुधारों से माता-पिता पर हजारों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। जो सेवाएं पहले एनडीआईएस के तहत सब्सिडी पर मिलती थीं, उनके लिए अब निजी भुगतान करना होगा।
स्पीच थेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, और अन्य सहायक उपचारों का खर्च कई परिवारों की आय से मेल नहीं खाता। कई माता-पिता पहले से ही बढ़ती जीवन-यापन लागत से परेशान हैं और इस बदलाव को "बिल शॉक" यानी अप्रत्याशित वित्तीय झटका बता रहे हैं।
सरकार का कहना है कि अगर अभी से सुधार नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में एनडीआईएस अस्थिर हो जाएगा और असली जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना मुश्किल होगा।
लेकिन विकलांगता अधिकार समूह और अभिभावक संगठनों का मानना है कि इस कदम से बच्चों की ज़रूरतें पूरी नहीं होंगी। उनका आरोप है कि सरकार खर्च घटाने के नाम पर परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रही है।
इन सुधारों पर संसद और समाज में व्यापक बहस की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस योजना को कैसे लागू करती है और क्या परिवारों को कोई राहत देने का प्रावधान भी किया जाएगा।