सिडनी। न्यू साउथ वेल्स (NSW) सरकार द्वारा राज्य में तेजी से बढ़ती जनसंख्या और आवास संकट से निपटने के लिए मिड-राइज़ अपार्टमेंट्स (चार से छह मंज़िला आवासीय इमारतें) के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इस योजना के तहत सरकार चाहती है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से मंजूरी दी जाए और उन्हें पारंपरिक डेवलपमेंट एप्लिकेशन (DA) प्रक्रिया से छूट दी जाए।
लेकिन स्थानीय नगर परिषदों और चुने हुए पार्षदों ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे न केवल स्थानीय समुदाय की राय को दरकिनार किया जाएगा, बल्कि इससे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और क्षेत्रीय संतुलन भी बिगड़ सकता है।
NSW सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में हज़ारों नए घर बनाए जाएं, ताकि घरों की कीमतों और किराए में बढ़ती महंगाई पर काबू पाया जा सके। इसके लिए सरकार "मिड-राइज़ हाउसिंग" को बढ़ावा दे रही है, यानी 4 से 6 मंज़िलों की आवासीय इमारतें, जिन्हें रेलवे स्टेशनों, बस डिपो और अन्य परिवहन केंद्रों के पास तेज़ी से मंजूरी दी जा सके।
सरकार चाहती है कि इन योजनाओं को कुछ शर्तों के साथ "कोड-अनुमोदन" (Code-Approved) प्रणाली के तहत स्वीकृति मिले, जिससे परिषदों को अनुमति देने की आवश्यकता न हो और विकासकर्ता (Developers) सीधे निर्माण शुरू कर सकें।
हालांकि इस योजना को लेकर परिषदों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही है। कुछ परिषदों ने इसे “जनविरोधी”, “लापरवाह” और “लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध” बताया है।
इनर वेस्ट काउंसिल की एक पार्षद ने कहा,
“अगर स्थानीय लोगों की राय को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाएगा, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही जैसा होगा। हमें ऐसे विकास की ज़रूरत है जो योजना अनुसार हो, न कि जल्दीबाज़ी में।”
वूलाहरा काउंसिल ने भी इस कदम को “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की विरासत और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
कई परिषदों ने चिंता जताई है कि अगर बड़ी संख्या में मिड-राइज़ अपार्टमेंट्स बनाए गए, तो स्कूल, सड़कें, पानी, सीवेज और पार्क जैसी मूलभूत सेवाओं पर भारी दबाव पड़ेगा, जिसकी तैयारी पहले से नहीं है।
राज्य सरकार का कहना है कि वे सभी हितधारकों से विचार-विमर्श कर रहे हैं और यह योजना आवास संकट को हल करने का हिस्सा है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा:
“हमें राज्य की वर्तमान और भविष्य की जनसंख्या ज़रूरतों को देखते हुए गंभीर निर्णय लेने होंगे। हम चाहते हैं कि हर किसी को किफायती और अच्छी गुणवत्ता वाला आवास उपलब्ध हो।”
राज्य के प्लानिंग मिनिस्टर का मानना है कि अगर परिषदें योजनाओं को बार-बार रोकती रहीं, तो हज़ारों लोग वर्षों तक किराए पर ही रहने को मजबूर रहेंगे।
इस प्रस्ताव को लेकर अगले कुछ महीनों में सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) की प्रक्रिया चलाई जाएगी, जिसमें आम नागरिक और स्थानीय संस्थाएं अपनी राय दे सकेंगी। इसके बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी कि कोड-अनुमोदन को कहां और किस रूप में लागू किया जाए।
इस बीच, सरकार और परिषदों के बीच इस मुद्दे पर टकराव तेज़ होता जा रहा है। आवास की मांग और योजनाबद्ध विकास के बीच संतुलन बनाना सरकार और स्थानीय निकायों — दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।