कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में लागू हुई नई वाहन उत्सर्जन नीति (New Vehicle Efficiency Standard – NVES) आम उपभोक्ताओं के लिए महँगी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस नीति के चलते लोकप्रिय यूट (utes), 4WD और फैमिली SUV की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी, जबकि चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को इसका सबसे ज़्यादा लाभ मिलेगा।
यह नीति 1 जुलाई 2025 से लागू हुई है, जिसके तहत तय उत्सर्जन सीमा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बेचने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं कम या शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को बेचने वाली कंपनियों को “कार्बन क्रेडिट” मिलेगा, जिसे वे अन्य कंपनियों को बेच सकती हैं।
कंसल्टिंग फर्म Pitcher Partners की रिपोर्ट के अनुसार, NVES के तहत 2029 तक कार कंपनियों पर 5.7 अरब से 12.8 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। यह लागत अंततः ग्राहकों से ही वसूली जाएगी।
अनुमानित जुर्माना:
2025: 109 मिलियन डॉलर
2026: 754 मिलियन डॉलर
2029 तक: हर साल लगभग 1.6 अरब डॉलर
Pitcher Partners के पार्टनर स्टीवन ब्रैग के अनुसार, कंपनियों या डीलरों के लिए इन जुर्मानों को खुद वहन करना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा कि नियम जटिल हैं और जुर्माना दो साल बाद लगाया जाता है, जिससे योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।
नई नीति के तहत हल्के व्यावसायिक वाहनों, यूट और बड़ी SUV के लिए 2025 में उत्सर्जन सीमा 201 ग्राम प्रति किलोमीटर तय की गई है, जिसे 2029 तक घटाकर 110 ग्राम प्रति किलोमीटर कर दिया जाएगा।
इसका सीधा असर डीज़ल यूट और बड़े SUV पर पड़ेगा, जो इन मानकों को पूरा नहीं कर पाते। टोयोटा लैंडक्रूज़र प्राडो, फोर्ड रेंजर जैसे लोकप्रिय मॉडल महँगे होने की आशंका है।
ऑस्ट्रेलिया के नेशनल ट्रांसपोर्ट कमीशन के अनुसार, देश में बिकने वाली लगभग 79 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें चीन में बनी होती हैं। BYD, MG और GWM जैसी कंपनियाँ पहले से ही कम उत्सर्जन वाले वाहन बेच रही हैं, जिससे उन्हें न सिर्फ जुर्माने से राहत मिलेगी बल्कि वे अन्य कंपनियों को क्रेडिट बेचकर मुनाफा भी कमा सकेंगी।
वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की 95 प्रतिशत गाड़ियाँ पेट्रोल या डीज़ल पर चलती हैं, और औसत उत्सर्जन यूरोप की तुलना में कहीं अधिक है। इससे पारंपरिक ब्रांड नई नीति में पीछे छूटते नजर आ रहे हैं।
विपक्षी गठबंधन ने NVES को “कार और यूट टैक्स” करार दिया है। शैडो ट्रांसपोर्ट मंत्री ब्रिजेट मैकेंज़ी ने कहा कि यह नीति आम ऑस्ट्रेलियाई परिवारों और छोटे कारोबारियों को सज़ा देने जैसी है।
उनका कहना है कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता बनाने के लिए पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों पर अप्रत्यक्ष कर लगा रही है, जिससे बाजार बिगड़ेगा और विदेशी, विशेषकर चीनी कंपनियों को अनुचित लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बढ़ती कीमतों के कारण लोग नई कार खरीदने से बचेंगे और पुरानी गाड़ियाँ लंबे समय तक इस्तेमाल करेंगे। इससे नई कारों की बिक्री 2029 तक 60 प्रतिशत तक गिर सकती है, जो पर्यावरणीय लक्ष्य के उलट असर डाल सकती है।
अब तक ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।