सिडनी, 9 जुलाई 2025 – एक ट्रांसजेंडर महिला ने न्यू साउथ वेल्स की अदालत में एक बेहद असामान्य लेकिन गंभीर शिकायत दर्ज की है। उनका दावा है कि अदालत की सुनवाई के दौरान उनकी पहचान और उपस्थिति को लेकर मज़ाक उड़ाया गया, जिससे उन्हें मानसिक आघात पहुँचा। इस घटना के चलते उन्होंने संबंधित पक्ष से $40,000 (करीब ₹27 लाख) मुआवज़े की माँग की है।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब सुनवाई के दौरान, वादी का आरोप है कि प्रतिवादी पक्ष के एक वकील ने उनकी लैंगिक पहचान पर ‘चुटकी’ ली, जिससे अदालत में बैठे अन्य लोग भी हँसने लगे। ट्रांस महिला का कहना है कि यह हँसी सिर्फ एक हल्की टिप्पणी नहीं थी, बल्कि एक "सार्वजनिक अपमान" था, जिसने उन्हें बेहद शर्मिंदा और असुरक्षित महसूस कराया।
महिला का कहना है कि अदालत एक न्यायिक स्थान है जहाँ सभी की गरिमा का सम्मान होना चाहिए, खासकर ऐसे व्यक्तियों की जो पहले से ही समाज में भेदभाव का सामना कर रहे हों। उन्होंने यह भी कहा कि यह हँसी उनके अधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक है और उन्होंने मानवाधिकार आयोग में भी इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई है।
इस मामले पर अदालत की तरफ से कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया और एलजीबीटीक्यूआई+ समुदाय में इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई लोगों ने इसे "गंभीर लैंगिक असंवेदनशीलता" बताया है और ट्रांस अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।
मुआवज़े की माँग के साथ-साथ महिला ने अदालत से सार्वजनिक माफ़ी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश लागू करने की भी माँग की है।
यह मामला सिर्फ एक मज़ाक पर हँसी का नहीं, बल्कि लैंगिक पहचान को लेकर न्याय व्यवस्था में संवेदनशीलता और सम्मान की आवश्यकता का प्रतीक बन गया है।