हेग (नीदरलैंड्स), 25 जून 2025 – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व के बीच संभावित मुलाकात को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस सप्ताह हो रही NATO शिखर बैठक में ट्रंप से आमने-सामने की कोई बैठक "विशेष रूप से तय नहीं है" और इससे ज्यादा अटकलबाज़ी नहीं की जानी चाहिए।
मार्ल्स, जो रक्षा मंत्री भी हैं, इस समय NATO समिट में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया यहां ‘इंडो-पैसिफिक फोर’ (IP4) के सदस्य देश के रूप में शामिल है — वे देश जो NATO के सदस्य नहीं हैं लेकिन संगठन के साथ करीबी सहयोग रखते हैं।
हाल में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि राष्ट्रपति ट्रंप IP4 प्रतिनिधियों से मुलाकात करना चाह रहे हैं, विशेषकर चीन से उत्पन्न संभावित खतरे को लेकर, जिसे उनकी सरकार ने “तत्काल” बताया है।
मार्ल्स ने कहा, “इस बैठक को लेकर मैं ज्यादा अर्थ नहीं निकालूंगा। ऐसे बहुपक्षीय सम्मेलनों में अक्सर यह देखा जाता है कि नेता उपस्थित हो पाते हैं या नहीं, और इसके पीछे कई कारण होते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय दौरे का पहले से ही एक विस्तृत कार्यक्रम है, और उन्हें संतुलन बनाना होता है।”
उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे क्षेत्रीय नेताओं की अनुपस्थिति पर भी कहा कि “मैं इसमें कुछ खास नहीं देखता, लेकिन वे यहां प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”
बुधवार सुबह ‘टुडे’ कार्यक्रम में बोलते हुए ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्याक्ष जिम चालमर्स ने भी ट्रंप और अल्बनीज़ की बैठक की संभावनाओं को तवज्जो न देते हुए कहा, “यह NATO सम्मेलन अमेरिका के राष्ट्रपति और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री के बीच बातचीत के लिए नहीं है। यह यूरोप और उससे आगे के रक्षा सहयोग पर केंद्रित सम्मेलन है।”
होस्ट कार्ल स्टेफानोविक के इस तंज पर कि “शायद ट्रंप अल्बो (प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़) में रुचि नहीं रखते”, चालमर्स ने जवाब दिया, “हमारे पास इस समिट के लिए अहम एजेंडा है, और उप प्रधानमंत्री उसे बखूबी निभाएंगे।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह तय नहीं है कि ट्रंप और मार्ल्स के बीच कोई छोटी मुलाकात होगी या नहीं, लेकिन उन्होंने दोहराया कि ऑस्ट्रेलिया की उपस्थिति इस मंच पर जरूरी और प्रभावशाली है।
“यह जरूरी है कि हम वहां मौजूद रहें, और उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री का प्रतिनिधित्व इस वैश्विक अवसर में ऑस्ट्रेलिया के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”