एक चौंकाने वाली घटना में जेम्स कुक विश्वविद्यालय (JCU) का एक मेडिकल छात्र उस समय विवादों में घिर गया जब उसने अपनी पूर्व प्रेमिका के साथ हिंसक व्यवहार किया और फिर उसके खून से सने चेहरे के साथ एक सेल्फी खींची। इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा छात्र को पढ़ाई जारी रखने और डिग्री दिए जाने के फैसले पर अब विश्वविद्यालय की कड़ी आलोचना हो रही है।
घटना टाउनस्विल में विश्वविद्यालय के सालाना मेडिसिन बॉल कार्यक्रम के दौरान हुई, जब छात्र उविंदु पंसुजा समरसी जयसेकरा ने अपनी पूर्व प्रेमिका पर तब हमला किया जब वह एक पुरुष मित्र से बात कर रही थी। कोर्ट को बताया गया कि जयसेकरा ने उसे एक कोने में धकेलकर कई बार मारा और फिर उसके ही फोन से एक सेल्फी खींची जबकि वह रो रही थी और उसके चेहरे से खून बह रहा था।
हाल ही में टाउनस्विल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जयसेकरा को दोषी मानते हुए दो साल की प्रोबेशन (परिवीक्षा) की सजा सुनाई और पीड़िता को मात्र $500 का मुआवजा देने का आदेश दिया। हालांकि, छात्र को आपराधिक दोषसिद्धि से राहत दी गई, जिससे वह अपने मेडिकल करियर को आगे बढ़ा सकता है।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, जब यह सामने आया कि विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने छात्र के पक्ष में चरित्र प्रमाण पत्र (character reference) दिया था। हालांकि विश्वविद्यालय ने सफाई दी है कि वह स्टाफ सदस्य "व्यक्तिगत हैसियत" में बयान दे रहा था, न कि विश्वविद्यालय की ओर से।
जेम्स कुक यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया,
“हम घरेलू हिंसा को बिल्कुल भी सहन नहीं करते और एक सुरक्षित, सम्मानजनक व समावेशी वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। छात्र को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है और उसकी मेडिकल कार्यक्रम में उपयुक्तता की समीक्षा की जा रही है।”
JCU मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर इस घटना पर “गहरा आघात” व्यक्त किया और कहा कि
“हिंसा, उत्पीड़न या डराने-धमकाने का कोई स्थान हमारे विश्वविद्यालय या चिकित्सा पेशे में नहीं है।”
इस बीच, टाउनस्विल की नर्स और JCU की पूर्व छात्रा एमा कोपन्स ने भी विश्वविद्यालय के नाम एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा:
“यह सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि एक नैतिक मामला भी है। विश्वविद्यालय का यह रवैया पीड़ितों को यह संदेश देता है कि उनकी पीड़ा से अधिक महत्वपूर्ण अपराधी का करियर है।”
अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या हिंसक प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले किसी छात्र को डॉक्टर जैसे जिम्मेदार पेशे में प्रवेश दिया जाना चाहिए? क्या ऐसे व्यक्ति पर मरीजों की जान की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए?