सिडनी: न्यू साउथ वेल्स में 2024 की हायर स्कूल सर्टिफिकेट (HSC) परीक्षा में स्टैंडर्ड इंग्लिश विषय को चुनने वाले छात्रों की संख्या 30,000 से अधिक रही, लेकिन इनमें से केवल 200 से भी कम छात्र ही टॉप बैंड में स्थान बना सके।
18 वर्षीय लौरा और क्लारा एबा, जिन्होंने HSC 2024 में स्टैंडर्ड इंग्लिश की पढ़ाई की थी, दोनों को 80 के दशक में अंक प्राप्त हुए — जो अच्छे माने जाते हैं, लेकिन टॉप रेंज में नहीं आते।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों का रुझान एडवांस्ड इंग्लिश से हटकर स्टैंडर्ड इंग्लिश की ओर बढ़ा है। इसकी एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि स्टैंडर्ड इंग्लिश को अपेक्षाकृत आसान समझा जाता है। हालांकि, नतीजों से पता चलता है कि इस विषय में अच्छे अंक लाना उतना आसान नहीं है।
बोर्ड ऑफ स्टडीज़ के आंकड़ों के अनुसार, जहां एडवांस्ड इंग्लिश में छात्र बड़ी संख्या में उच्च अंक प्राप्त कर पा रहे हैं, वहीं स्टैंडर्ड इंग्लिश में टॉप बैंड यानी 90 से ऊपर अंक लाने वालों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह ट्रेंड छात्रों की उच्च शिक्षा में अवसरों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए ATAR स्कोर पर इसका सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों ने स्कूलों से आग्रह किया है कि वे छात्रों को विषय चयन के समय सही मार्गदर्शन दें, ताकि वे अपनी क्षमता और करियर की दिशा को ध्यान में रखकर विषय चुन सकें।