बीजिंग/तियानजिन, 30 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद शनिवार को चीन की धरती पर पहुँचे। उनका यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एशियाई देशों के बीच आपसी सहयोग और संवाद को नया आयाम देने वाला भी माना जा रहा है। मोदी चीन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे और इस दौरान कई अहम वैश्विक नेताओं से मुलाकात करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का तियानजिन शहर में भव्य स्वागत किया गया। खास बात यह रही कि उनका अभिनंदन पारंपरिक भारतीय नृत्य कथक से किया गया। चीन की प्रसिद्ध नृत्यांगना डू जुआन, जिनका भारतीय नाम सचिता है, ने कथक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से कथक सीख रही हैं और प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में प्रदर्शन करना उनके लिए सम्मान की बात है। मोदी के आगमन पर मौजूद भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साह प्रकट किया।
मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का संबोधन सदस्य देशों के लिए नई दिशा तय कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा का सबसे अहम हिस्सा उनके द्विपक्षीय संवाद होंगे। उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से प्रस्तावित है।
चीन से वार्ता: सीमा विवाद, व्यापारिक संतुलन और लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा की संभावना है।
रूस से बैठक: ऊर्जा आपूर्ति, रक्षा सहयोग और यूरेशिया में स्थिरता के लिए भारत-रूस साझेदारी पर गहन बातचीत होगी।
यह मुलाकातें भारत की विदेश नीति और रणनीतिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।