कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की वन नेशन पार्टी की मुखिया और विवादित राजनीतिक चेहरा पॉलिन हैनसन ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि आने वाले 15 वर्षों में वन नेशन सरकार का नेतृत्व करेगी और देश की सत्ता पर काबिज होगी।
हैनसन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उनकी पार्टी के किसी सीनेटर की सीट खाली होती है, तो वह अपनी बेटी ली या अपने करीबी सहयोगी और चीफ ऑफ स्टाफ जेम्स ऐश्बी को उस पद पर नहीं भेजेंगी। उन्होंने कहा कि वन नेशन का भविष्य किसी परिवारवाद या निजी निष्ठा पर नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आधारित होगा।
पॉलिन हैनसन का मानना है कि जनता अब मुख्यधारा की दोनों बड़ी पार्टियों – लिबरल और लेबर – से धीरे-धीरे निराश हो चुकी है। उन्होंने कहा, “लोग विकल्प चाहते हैं, और वह विकल्प वन नेशन है। हमारी पार्टी आम नागरिकों की आवाज़ बनेगी और अगले 15 सालों में हम सरकार का हिस्सा नहीं बल्कि सरकार का नेतृत्व करेंगे।”
हाल के समय में यह चर्चा थी कि यदि हैनसन किसी कारण से सीनेट छोड़ती हैं, तो उनकी बेटी ली या फिर जेम्स ऐश्बी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। लेकिन हैनसन ने इन कयासों को खारिज करते हुए साफ कहा कि पार्टी का नेतृत्व किसी एक व्यक्ति पर नहीं टिका है। उन्होंने यह भी दोहराया कि वन नेशन में योग्य और प्रतिबद्ध नेताओं की कोई कमी नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हैनसन का दावा साहसिक जरूर है, लेकिन इसे पूरा करना आसान नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में वन नेशन अभी भी एक सीमित समर्थन वाली पार्टी है, जो मुख्य रूप से ग्रामीण और अल्पशहरी इलाकों में लोकप्रिय है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. स्टीफन विल्सन का कहना है, “वन नेशन ने पिछले कुछ सालों में जनाधार बढ़ाया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सरकार बनाने के लिए उसे बड़े पैमाने पर समर्थन जुटाना होगा। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में यह लक्ष्य बेहद कठिन है।”
वन नेशन के इस दावे पर विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लेबर पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह जनता को गुमराह करने वाला बयान है। ऑस्ट्रेलिया कभी भी इतनी संकीर्ण और विभाजनकारी सोच वाली पार्टी को सत्ता नहीं सौंपेगा।”
वहीं लिबरल पार्टी के नेताओं का कहना है कि हैनसन के बयानों को मीडिया में सुर्खियाँ जरूर मिलती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।