मुनीर की तारीफ, लेकिन पाकिस्तानियों पर सख्ती: ट्रंप की नीति ने उठाए सवाल

मुनीर की तारीफ, लेकिन पाकिस्तानियों पर सख्ती: ट्रंप की नीति ने उठाए सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप के फैसले चर्चा में हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को हाल में ‘फेवरिट जनरल’ बताने वाले ट्रंप प्रशासन ने उसी पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए वहां के नागरिकों के लिए अमेरिकी इमिग्रेंट वीजा पर लगभग स्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले ने ट्रंप के बयानों और नीतियों के बीच विरोधाभास को उजागर कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान को “हाई-रिस्क नेशन” की श्रेणी में रखते हुए इमिग्रेशन प्रक्रिया को रोक दिया है। इसका सीधा असर उन हजारों पाकिस्तानी नागरिकों पर पड़ेगा जो अमेरिका में बसने का सपना देख रहे थे। नए नियमों के तहत न केवल नए इमिग्रेंट वीजा रोके गए हैं, बल्कि कई लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी ठप हो गई है।

सुरक्षा कारणों का हवाला

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कुछ देशों से आने वाले आव्रजन मामलों में दस्तावेज़ों की सत्यता, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और आतंकी गतिविधियों से जुड़े जोखिम सामने आए हैं। पाकिस्तान को भी ऐसे ही देशों की सूची में शामिल किया गया है।

तारीफ और तंज साथ-साथ

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। इसे पाकिस्तान में अमेरिका-पाक संबंधों में नरमी के संकेत के तौर पर देखा गया। लेकिन वीजा नीति पर सख्ती के बाद अब यही तारीफ पाकिस्तान में सवालों के घेरे में है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की विदेश नीति अक्सर व्यक्तियों और संस्थाओं को अलग-अलग नजरिये से देखती है। एक ओर सैन्य नेतृत्व से रणनीतिक रिश्ते बनाए जाते हैं, तो दूसरी ओर आम नागरिकों के लिए इमिग्रेशन के दरवाजे बंद किए जाते हैं।

पाकिस्तानी नागरिकों में नाराजगी

इस फैसले से अमेरिका में पढ़ाई, नौकरी या स्थायी निवास की तैयारी कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों में निराशा और गुस्सा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया है कि जब शीर्ष स्तर पर रिश्तों की बात हो रही है, तो आम लोगों को क्यों इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति एक बार फिर यह दिखाती है कि अमेरिका की इमिग्रेशन रणनीति में सख्ती प्राथमिकता बनी हुई है, भले ही कूटनीतिक मंचों पर दोस्ती के बयान क्यों न दिए जाएं।