राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 प्रतिष्ठित हस्तियों को किया मनोनीत, जानिए कौन हैं ये चेहरे

राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 प्रतिष्ठित हस्तियों को किया मनोनीत, जानिए कौन हैं ये चेहरे

नई दिल्ली | 13 जुलाई 2025
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को नामांकित किया है। ये चारों नाम देश के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाने जाते हैं। आइए जानते हैं कौन हैं ये चार चेहरे—


1. उज्ज्वल निकम – प्रसिद्ध विशेष लोक अभियोजक

महाराष्ट्र के वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम को आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में उनकी निर्णायक भूमिका के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1993 मुंबई ब्लास्ट, अजमल कसाब का मुकदमा (26/11 मुंबई हमले), और कई हाई-प्रोफाइल मामलों में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी सटीक रणनीति और कानूनी सूझबूझ के लिए उन्हें देशभर में सराहा जाता है।


2. हर्षवर्धन श्रृंगला – पूर्व विदेश सचिव

राजनयिक सेवाओं में चार दशकों तक देश की सेवा करने वाले हर्षवर्धन श्रृंगला भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं। वे अमेरिका में भारत के राजदूत भी रहे और कोविड काल में वैश्विक कूटनीतिक संवाद में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी विशेषज्ञता विदेश नीति, रणनीतिक मामलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में है।


3. डॉ. मीनाक्षी जैन – इतिहासकार और लेखक

डॉ. मीनाक्षी जैन एक प्रतिष्ठित इतिहासकार और लेखक हैं, जो भारतीय संस्कृति और इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें "सत्य की खोज में अयोध्या विवाद", "राम मंदिर आंदोलन", और "हिंदू समाज की परंपराएं" जैसी किताबें प्रमुख हैं। वह पूर्व में दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रह चुकी हैं।


4. सी. सदानंदन मास्टर – सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक

केरल के कासरगोड जिले से आने वाले सी. सदानंदन मास्टर शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में वर्षों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए अनेक विद्यालय शुरू किए और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया। बालिका शिक्षा, आदिवासी अधिकार और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।


सरकार की मंशा

इन चारों नामांकनों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार कला, संस्कृति, शिक्षा, कूटनीति और न्यायिक प्रणाली के क्षेत्र में समर्पित विशेषज्ञों को संसद में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम कर रही है। ये चेहरे न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट हैं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श को समृद्ध बनाने की क्षमता भी रखते हैं।