दो वर्षों में पहली बार गिरी वास्तविक मजदूरी, ऑस्ट्रेलिया में महंगाई ने वेतन वृद्धि को किया बेअसर

दो वर्षों में पहली बार गिरी वास्तविक मजदूरी, ऑस्ट्रेलिया में महंगाई ने वेतन वृद्धि को किया बेअसर

सिडनी/कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में दो वर्षों के बाद पहली बार वास्तविक मजदूरी (रियल वेज) में गिरावट दर्ज की गई है। ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वेतन में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन तेज़ महंगाई दर ने इस बढ़ोतरी को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों की वास्तविक आय और क्रय शक्ति में कमी आई है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही नाममात्र वेतन वृद्धि (नॉमिनल वेज ग्रोथ) सकारात्मक दिखाई दे रही हो, लेकिन मुद्रास्फीति के समायोजन के बाद वास्तविक आय घट गई है। ऑस्ट्रेलिया में खाद्य पदार्थों, ईंधन, आवास और अन्य आवश्यक सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

सार्वजनिक क्षेत्र की वेतन वृद्धि निजी क्षेत्र से आगे

जारी आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि निजी क्षेत्र की तुलना में अधिक तेज रही है। सरकारी कर्मचारियों को अपेक्षाकृत बेहतर वेतन वृद्धि मिली है, जबकि निजी क्षेत्र में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी रही। इससे दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के बीच आय असमानता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मध्यम वर्ग और निश्चित आय वालों पर असर

वास्तविक मजदूरी में गिरावट का सबसे अधिक प्रभाव मध्यम वर्ग और निश्चित आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई दर को नियंत्रित नहीं किया गया, तो उपभोक्ता खर्च में कमी आ सकती है, जिससे व्यापक आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

आगे की चुनौती

अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि महंगाई पर नियंत्रण, उत्पादकता वृद्धि और रोजगार सृजन पर ध्यान देना आवश्यक है। आने वाले समय में ऑस्ट्रेलियाई सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियां आर्थिक संतुलन बहाल करने में अहम भूमिका निभाएंगी।