सीरिया के उत्तर-पूर्व में स्थित रोज़ कैंप (Roj Camp) की निदेशक ने एक अहम खुलासा करते हुए बताया है कि दो और ऑस्ट्रेलियाई महिलाएँ, जो कभी ISIS से जुड़ी रही हैं, शिविर में अलग से रखी गई हैं। इन महिलाओं को “अत्यंत कट्टरपंथी” श्रेणी में रखा गया है और इन्हें उन 11 ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं तथा 23 बच्चों से अलग रखा गया है जिनकी अपने देश वापसी (रिपैट्रिएशन) की मांग अब तक स्वीकार नहीं की गई है।
शिविर प्रशासन के अनुसार, इन दोनों महिलाओं के विचार और गतिविधियाँ अब भी चरमपंथी मानी जाती हैं, इसलिए सुरक्षा कारणों से उन्हें बाकी बंदियों से दूर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन महिलाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि शिविर में किसी प्रकार की कट्टरपंथी गतिविधि या प्रभाव न फैल सके।
ऑस्ट्रेलिया सरकार लंबे समय से अपने नागरिकों को सीरिया के इन शिविरों से वापस लाने के मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाए हुए है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर मामले का अलग-अलग आकलन किया जा रहा है। वहीं मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि महिलाओं और बच्चों को लंबे समय तक शिविरों में रखना उनके बुनियादी अधिकारों के खिलाफ है और उन्हें सुरक्षित तरीके से स्वदेश लाने की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में सुरक्षा जोखिम, कानूनी जटिलताएँ और पुनर्वास की चुनौतियाँ सरकारों के सामने बड़ी बाधा बनती हैं। रोज़ कैंप सहित सीरिया के कई शिविरों में हजारों विदेशी नागरिक अब भी बंद हैं, जिनमें महिलाएँ और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं।
यह नया खुलासा ऑस्ट्रेलिया में इस बहस को फिर से तेज कर सकता है कि क्या देश को अपने नागरिकों को वापस लाकर उनके पुनर्वास और निगरानी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए या उन्हें वहीं रहने देना चाहिए।