तेल टैंकर की जब्ती पर रूस-अमेरिका तनाव बढ़ा, रूसी सांसद की परमाणु चेतावनी से चिंता

तेल टैंकर की जब्ती पर रूस-अमेरिका तनाव बढ़ा, रूसी सांसद की परमाणु चेतावनी से चिंता

नई दिल्ली/वॉशिंगटन।
उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज वाले एक तेल टैंकर को अमेरिकी तटरक्षक बल द्वारा जब्त किए जाने के बाद रूस और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। इस घटना पर रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें एक वरिष्ठ सांसद ने सैन्य कार्रवाई तक की चेतावनी दी है।

मामला 7 जनवरी का बताया जा रहा है, जब अमेरिकी तटरक्षक बल ने ‘मरीनेरा’ नामक तेल टैंकर को उत्तरी अटलांटिक महासागर में रोका और अपने नियंत्रण में ले लिया। यह टैंकर पहले ‘बेला-1’ के नाम से जाना जाता था और उस पर रूसी ध्वज लगा हुआ था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह जहाज वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल व्यापार से संबंधित था और लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद रूस की संसद के रक्षा मामलों की समिति के उपाध्यक्ष एलेक्सी जुरावलेव ने कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और रूस की संप्रभुता पर हमला बताया। जुरावलेव ने कहा कि रूसी ध्वज वाले जहाज पर कब्जा करना रूस के क्षेत्रीय हितों पर सीधा प्रहार है।

अपने बयान में जुरावलेव ने यह भी कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई का जवाब केवल कूटनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि सैन्य रूप से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि अमेरिकी ऑपरेशन में शामिल जहाजों पर टॉरपीडो हमले किए जाने चाहिए।

सबसे गंभीर टिप्पणी उस समय सामने आई जब रूसी सांसद ने रूस के सैन्य सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय हितों पर गंभीर हमला होता है, तो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प भी मौजूद है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब यूक्रेन युद्ध, नाटो विस्तार और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर रूस और अमेरिका के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। ऐसे में समुद्री क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा सकती है।

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बयानबाज़ी पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि कूटनीतिक हलकों में इसे एक गंभीर घटनाक्रम माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में वैश्विक सुरक्षा संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकता है।

तेल टैंकर की यह जब्ती अब केवल एक कानूनी या व्यापारिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह महाशक्तियों के बीच शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक संदेश का नया प्रतीक बनती दिखाई दे रही है।