ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जिम चॉल्मर्स ने विपक्ष के नेट ज़ीरो लक्ष्य को खत्म करने के फैसले को “आर्थिक पागलपन” करार देते हुए चेतावनी दी है कि इससे देश में महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) में होने वाला अरबों डॉलर का निजी निवेश बुरी तरह प्रभावित होगा।
महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों की रीढ़ माने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में अमेरिका के साथ 13 अरब डॉलर का करार किया है और स्थानीय कंपनियों को टैक्स राहत देकर खुद को चीन के मुकाबले इस क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बनाने की कोशिश की है। हालांकि विपक्ष इन टैक्स रियायतों का विरोध करता रहा है।
डेलॉयट की नवीनतम इन्वेस्टमेंट मॉनिटर रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 11 अरब डॉलर से अधिक की क्रिटिकल मिनरल्स परियोजनाएँ योजना चरण में हैं। ट्रेजरी का मानना है कि 2050 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है।
चॉल्मर्स ने कहा, “विपक्ष जो प्रस्ताव लेकर आया है, वह ऊर्जा बाज़ार, निवेश के माहौल और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र—तीनों पर विनाशकारी असर डालेगा। नेट ज़ीरो को छोड़ना एक आर्थिक आपदा साबित होगा।”
उन्होंने दावा किया कि इससे निवेश घटेगा, बिजली की कीमतें बढ़ेंगी और रोजगार के अवसर कम होंगे।
ट्रेजरी की मॉडलिंग में भी साफ़ चेतावनी दी गई है कि 2050 तक नेट ज़ीरो का पीछा न करने पर आर्थिक वृद्धि धीमी होगी, निवेश घटेगा और नए निर्यात बाज़ारों के अवसर हाथ से निकल जाएंगे। इसके अलावा वैश्विक बाज़ारों में उधार लेने की लागत भी बढ़ सकती है।
उधर, विपक्ष का कहना है कि सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं ने ही बिजली की कीमतें बढ़ाई हैं और भारी उद्योगों को नुकसान पहुँचाया है। विपक्षी वित्त प्रवक्ता जेम्स पैटर्सन ने कहा, “हम उत्सर्जन कम करना चाहते हैं, लेकिन सस्ती ऊर्जा हमारी पहली प्राथमिकता है। AEMO को भी यही निर्देश होना चाहिए कि उसकी जिम्मेदारी उत्सर्जन घटाना नहीं, बल्कि सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है।”
विपक्ष नेता सुसन ले ने भी अपने मंच से नेट ज़ीरो लक्ष्य हटा दिया है और सरकार पर आरोप लगाया है कि उसकी ऊर्जा नीतियों के कारण घर–परिवार और उद्योग दोनों बढ़ती कीमतों का बोझ झेल रहे हैं।