ऑस्ट्रेलियाई संसद की एक सीनेट जांच समिति ने पाया है कि देश की विश्वविद्यालयों के कुलपति (Vice-Chancellor) और वरिष्ठ अधिकारी अत्यधिक वेतन पा रहे हैं। समिति ने सिफारिश की है कि उनके वेतन पर अब एक सीमा तय की जानी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुलपति करोड़ों रुपये (अक्सर $1 मिलियन से अधिक) का वेतन ले रहे हैं, जो राज्य प्रमुखों और यहां तक कि प्रधानमंत्री से भी कहीं अधिक है। यह स्तर समाज की उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत बताया गया।
ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ने समिति को जानकारी दी कि कुलपतियों की सैलरी वृद्धि लंबे समय से विश्वविद्यालय के साधारण कर्मचारियों की आय वृद्धि से कहीं अधिक रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालयों में “परिणामहीन विफलता की संस्कृति” व्याप्त है।
लगातार असफलताओं के बावजूद शीर्ष अधिकारियों को पुरस्कृत किया जाता है।
संरचनात्मक बदलावों और छंटनी ने कर्मचारियों और छात्रों के बीच असंतोष और अविश्वास को गहरा किया।
स्वतंत्र सूचना (FOI) आवेदनों पर “पूर्ण अस्वीकृति” कर दी जाती है, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
रिपोर्ट ने कुल 12 सुझाव दिए, जिनमें शामिल हैं:
एक वेतन न्यायाधिकरण (Remuneration Tribunal) विश्वविद्यालय परिषदों के साथ मिलकर कुलपति और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए वेतन संरचना और वर्गीकरण तय करे।
विश्वविद्यालय प्रशासन में चुने गए छात्र और कर्मचारी प्रतिनिधियों को समान अधिकार और सम्मान मिले।
वाणिज्यिक गोपनीयता के नाम पर सार्वजनिक दस्तावेज छिपाने पर रोक लगे।
लेबर सांसद टोनी शेल्डन ने कहा –
“देश में और किसी भी क्षेत्र में असफलता को इतना बड़ा इनाम और इतनी कम जांच नहीं मिलती।”
वहीं ग्रीन पार्टी की सांसद मेहरीन फारूकी ने विश्वविद्यालय शासन प्रणाली को तुरंत बदलने की मांग की। उनके अनुसार –
“यह जांच स्पष्ट रूप से दिखाती है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन अत्यधिक भुगतान, अहंकार, अपारदर्शी और गैर-जवाबदेह है। अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”