कैनबरा – ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने कर प्रणाली में सुधार को लेकर बहस की शुरुआत करते हुए संकेत दिया है कि देश की मौजूदा टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलाव आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, एक उच्च-स्तरीय समीक्षा में स्टैम्प ड्यूटी को समाप्त करने, आयकर दरों में कटौती और पूंजीगत लाभ कर में बदलाव जैसे प्रस्ताव शामिल किए जा सकते हैं।
वर्तमान में राज्य सरकारों द्वारा वसूली जाने वाली स्टैम्प ड्यूटी को लेकर वर्षों से आलोचना होती रही है, खासकर जब यह संपत्ति खरीदने वालों पर एक बड़ा आर्थिक बोझ बनती है। कई अर्थशास्त्री इसे "आर्थिक रूप से नुकसानदायक टैक्स" मानते हैं जो लोगों को घर बदलने से रोकता है और संपत्ति बाजार में गतिशीलता को कम करता है।
विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही इसे चरणबद्ध रूप से समाप्त करने या इसके विकल्प की दिशा में काम शुरू कर दिया है, जहां इसे वार्षिक भूमि कर से बदला जा सकता है। अब फेडरल स्तर पर भी इस दिशा में चर्चा होना कर प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन का संकेत है।
इसके अलावा, मध्यम वर्ग पर आयकर का बोझ कम करने और श्रम बाजार को प्रोत्साहित करने के लिए आयकर दरों में संशोधन की भी सिफारिश की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, न्यायसंगत और भविष्य के लिए टिकाऊ बनाने के लिए इन कदमों की आवश्यकता है।
हालांकि, चाल्मर्स ने अभी तक किसी प्रस्ताव की स्पष्ट रूप से पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा है कि “हमारे पास कर सुधार का एक ऐतिहासिक मौका है जो देश की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय को मजबूत कर सकता है।”
सरकार अगले कुछ महीनों में व्यापक परामर्श के बाद प्रस्तावित सुधारों पर निर्णय ले सकती है। इस दौरान व्यापारिक संगठनों, संघों, राज्यों और नागरिक समाज से राय ली जाएगी।
यदि यह सुधार अमल में लाया जाता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया की कर नीति में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।