सिडनी नगर परिषद की हालिया बैठक में एक पार्षद ने राज्य सरकार की वेप (ई-सिगरेट) बिक्री रोकने की नीति पर कड़ी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि सरकार की मौजूदा कार्रवाई "पूरी तरह विफल" साबित हुई है और यह समस्या दिन-ब-दिन महामारी का रूप ले रही है।
पार्षद ने बताया कि सिडनी के कई इलाकों में किशोर और स्कूली छात्र आसानी से वेप खरीद रहे हैं। दुकानों के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी वेप की आपूर्ति बिना किसी रोक-टोक के जारी है। "यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार की ओर से जो अभियान चलाए जा रहे हैं, वे इस संकट के पैमाने से मेल नहीं खाते," उन्होंने कहा।
काउंसिल के अनुसार, सिडनी में वेपिंग का असर अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में नाबालिग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। निकोटीन की उच्च मात्रा वाले ये ई-सिगरेट न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहे हैं। कई स्कूल प्रशासन ने भी चिंता जताई है कि विद्यार्थियों में वेपिंग की लत तेज़ी से फैल रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वेप का निरंतर उपयोग निकोटीन की लत को बढ़ावा देता है और भविष्य में कैंसर तथा हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, युवा मरीज़ों में सांस से जुड़ी समस्याओं और मानसिक तनाव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
सिडनी काउंसिल ने राज्य सरकार से मांग की है कि—
अवैध वेप बिक्री पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।
स्कूलों और समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
दोषी दुकानदारों और ऑनलाइन विक्रेताओं पर कड़ी सज़ा दी जाए।
बच्चों और युवाओं को इस लत से बचाने के लिए हेल्पलाइन और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
स्थानीय अभिभावकों ने भी सरकार से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वेपिंग पर कठोर नियंत्रण लगाया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह "स्वास्थ्य आपदा" का रूप ले सकती है।