ऑस्ट्रेलिया में सांसदों को मिलने वाले यात्रा और आवास भत्तों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। एक हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि कई ऐसे राजनेता, जिनके पास राजधानी कैनबरा में पहले से ही निजी आवास हैं, उन्होंने इसके बावजूद सरकारी आवास और यात्रा भत्ते का दावा किया। इस प्रक्रिया में करदाताओं के पैसे से करीब 15 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च किए गए।
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा लिबरल पार्टी की वरिष्ठ सांसद Michaelia Cash को लेकर हो रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, माइकेलिया कैश ने बीते 40 महीनों में कुल 1,23,978 डॉलर का यात्रा और आवास भत्ता लिया। औसतन यह राशि हर महीने 3,000 डॉलर से अधिक बैठती है। खास बात यह है कि यह दावा उस अवधि में किया गया, जब वह कैनबरा में अपने ही स्वामित्व वाले घर में ठहरी हुई थीं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि माइकेलिया कैश अकेली ऐसी सांसद नहीं हैं। कई अन्य राजनेताओं ने भी नियमों के दायरे में रहते हुए इस तरह के भत्तों का लाभ उठाया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह भले ही कानूनी रूप से सही हो, लेकिन नैतिक दृष्टि से यह सवालों के घेरे में है।
विपक्षी दलों और पारदर्शिता से जुड़े संगठनों का तर्क है कि जब किसी सांसद के पास राजधानी में निजी घर मौजूद है, तो उसे सरकारी आवास भत्ता लेने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि आम नागरिक बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं, जबकि जनप्रतिनिधि करदाताओं के पैसे से अतिरिक्त सुविधाएं ले रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार और संबंधित सांसदों का कहना है कि मौजूदा नियमों के तहत यात्रा और आवास भत्ता लेने में कोई अनियमितता नहीं हुई है। उनका दावा है कि सांसदों को उनके कार्यस्थल और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए यह भत्ते दिए जाते हैं और यदि नियमों में खामी है, तो उसकी समीक्षा संसद में की जानी चाहिए।
इस खुलासे के बाद ऑस्ट्रेलिया में सांसदों की सुविधाओं, भत्तों की पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आम जनता और विशेषज्ञों की मांग है कि नियमों में स्पष्टता लाई जाए, ताकि भविष्य में करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ किया जा सके।