एटीएआर 50 में भी टीचिंग में दाख़िला, विश्वविद्यालयों की लाचारी या शिक्षा व्यवस्था का संकट?

एटीएआर 50 में भी टीचिंग में दाख़िला, विश्वविद्यालयों की लाचारी या शिक्षा व्यवस्था का संकट?

सिडनी। इस साल ऑस्ट्रेलिया के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों ने शिक्षण (Teaching) की पढ़ाई के लिए ऐसे छात्रों को भी दाख़िला दिया है जिनका एटीएआर (Australian Tertiary Admission Rank - ATAR) स्कोर 50 के दशक में था। चार्ल्स स्टर्ट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल और ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी उन संस्थानों में शामिल हैं जहाँ प्रवेश के न्यूनतम मानदंडों को काफ़ी कम करना पड़ा।

मेधावी छात्र चुन रहे हैं अन्य कोर्स

जहाँ एक ओर उच्चतम एचएससी (HSC) अंक पाने वाले छात्र एक्चुरियल स्टडीज़, लॉ और इंजीनियरिंग जैसे प्रतिस्पर्धी और उच्च वेतन वाले प्रोफेशनल कोर्स की ओर बढ़े, वहीं टीचिंग की पढ़ाई में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यार्थियों का रुझान बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र के लिए लंबे समय तक गंभीर परिणाम ला सकती है।

क्यों गिरी टीचिंग की लोकप्रियता?

पिछले कुछ वर्षों में शिक्षण पेशे में आकर्षण लगातार कम हुआ है।

  • स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और कार्यभार का दबाव

  • अपेक्षाकृत कम वेतन और करियर में सीमित अवसर

  • उच्च अंक वाले छात्रों का दूसरे पेशों की ओर रुझान
    ये कुछ प्रमुख कारण बताए जाते हैं जिनसे टीचिंग कोर्सेज़ में दाख़िले के लिए न्यूनतम एटीएआर लगातार घट रहा है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर असर का डर

विशेषज्ञ मानते हैं कि टीचिंग कोर्स में कम एटीएआर वाले छात्रों के दाख़िले से भविष्य में शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
शिक्षा विश्लेषक प्रोफेसर डेविड लायंस का कहना है, “अगर हम केवल शिक्षक की संख्या पूरी करने के लिए मानदंड गिराते हैं तो आने वाले वर्षों में क्लासरूम की गुणवत्ता से समझौता होगा।”

सरकार और विश्वविद्यालयों पर सवाल

इस स्थिति ने सरकार और विश्वविद्यालयों दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिक्षक बनने के लिए प्रवेश मानक इतने कम होने चाहिए? क्या शिक्षा के इस अहम पेशे को आकर्षक बनाने के लिए वेतन, सम्मान और सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए?