नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025 – विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों पर तीखा प्रहार किया और याद दिलाया कि वॉशिंगटन अपने इतिहास को भूल रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ओसामा बिन लादेन जैसे सबसे बड़े आतंकी को 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद सैन्य ठिकाने से बरामद किया गया था, फिर भी अमेरिका पाकिस्तान पर भरोसा करता है।
जयशंकर ने यह टिप्पणी ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम में एक सवाल के जवाब में की। जब उनसे अमेरिका और पाकिस्तान की नजदीकियों—खासतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाने—पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा:
“अमेरिका और पाकिस्तान का एक इतिहास है, और उस इतिहास को नज़रअंदाज़ करने का भी इतिहास है। यह पहली बार नहीं हो रहा। वही सेना, जिसके प्रमाणपत्रों पर अमेरिका भरोसा करता है, वही सेना एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को छिपाए बैठी थी।”
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम करवाने में मध्यस्थता की थी। इस पर जयशंकर ने सख्त प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो संघर्षविराम हुआ, वह दोनों देशों ने आपसी बातचीत से किया था, किसी तीसरे पक्ष ने नहीं।
“जब कोई संघर्ष होता है तो फोन कॉल्स जरूर होते हैं—अमेरिका से भी, अन्य देशों से भी। मैंने खुद इस तरह की कॉल्स की हैं, चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इज़रायल-ईरान तनाव। लेकिन यह कहना कि युद्धविराम किसी और ने कराया, तथ्यात्मक रूप से गलत है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से अपने रिश्तों को संरचनात्मक मजबूती और आपसी भरोसे के आधार पर देखता है।
“मैं हालात के हिसाब से प्रतिक्रिया देता हूं, लेकिन हमेशा दीर्घकालिक संबंधों की मजबूती को ध्यान में रखकर। मुझे पता है मेरी ताकत क्या है और मेरे रिश्तों का महत्व क्या है। इसी आत्मविश्वास से हम आगे बढ़ते हैं,” उन्होंने कहा।