अमेरिका चीन से युद्ध की तैयारी में जुटा, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मांगी सैन्य मदद: रिपोर्ट

अमेरिका चीन से युद्ध की तैयारी में जुटा, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मांगी सैन्य मदद: रिपोर्ट

वॉशिंगटन/नई दिल्ली – अमेरिका ने चीन के संभावित हमले की स्थिति में ताइवान की रक्षा के लिए व्यापक सैन्य रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस योजना में अपने प्रमुख सहयोगियों जापान और ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने की मांग की है। इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका चीन की आक्रामक नीतियों को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी युद्ध की संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी पेंटागन ने गुप्त रूप से जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संभावित युद्ध योजना पर चर्चा की है। यह योजना चीन द्वारा ताइवान पर हमले की आशंका को लेकर तैयार की जा रही है। अमेरिकी सैन्य अधिकारी इस रणनीति के तहत यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ताइवान पर आक्रमण की स्थिति में उसके सहयोगी देश तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकें।

क्या है अमेरिका की योजना?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ‘इंटीग्रेटेड डिटरेंस’ यानी एकीकृत प्रतिरोध रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें उसके प्रमुख सहयोगी राष्ट्रों की सैन्य भूमिका को स्पष्ट किया जा रहा है। इस रणनीति के तहत अमेरिका युद्ध में केवल अकेले नहीं लड़ेगा, बल्कि जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की मदद से एक व्यापक मोर्चा खड़ा करेगा।

पेंटागन का उद्देश्य यह है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक समन्वित और तेज प्रतिक्रिया दे सकें। इसके लिए जापान में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पहले से ही एक्टिव मोड में रखा गया है और ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा प्रशिक्षण अभियानों की योजना बनाई जा रही है।

क्यों है ताइवान इतना महत्वपूर्ण?

ताइवान लंबे समय से चीन और अमेरिका के बीच तनाव का प्रमुख बिंदु रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित कर चुका है। अमेरिका ने कई बार साफ किया है कि वह ताइवान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की भूमिका?

हालांकि इस रिपोर्ट में भारत का नाम नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। अमेरिका पहले ही क्वाड (Quad) जैसे मंचों पर भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।