सिडनी: यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ-साथ दोस्ती और सामाजिक मेलजोल का अनुभव भी छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि कुछ कोर्सेज में छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत की संभावनाएं काफी कम होती हैं।
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) की छात्रा क्लोए अपने दोस्तों सिएना एस्वरन और अमाली ब्रिजन के साथ पढ़ाई का आनंद लेती हैं। लेकिन हर छात्र इतना सौभाग्यशाली नहीं होता।
एक विस्तृत अध्ययन में पाया गया है कि कुछ विशेष विषयों में लगभग आधे छात्र यह महसूस करते हैं कि उन्हें अपने सहपाठियों से अच्छी तरह जुड़ने का अवसर नहीं मिलता। यह स्थिति विशेष रूप से तकनीकी और एकल-प्रेरित कोर्सेज जैसे कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग और ऑनलाइन आधारित कार्यक्रमों में देखने को मिलती है।
वहीं दूसरी ओर, कला, सामाजिक विज्ञान, और चिकित्सा जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों के बीच गहरी दोस्ती और सहयोग की भावना अधिक पाई गई। इसका मुख्य कारण ये माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में समूह कार्य, चर्चा और सामाजिक भागीदारी की अधिक संभावनाएं होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिवर्सिटीज को अब शिक्षा के साथ-साथ छात्र समुदाय के सामाजिक विकास पर भी ध्यान देना होगा। सकारात्मक माहौल और सामूहिक गतिविधियों से छात्रों की मानसिक सेहत में भी सुधार होता है और उनका अकादमिक प्रदर्शन बेहतर होता है।
छात्रों की राय भी यही दर्शाती है। "जब क्लास में दोस्त होते हैं, तो पढ़ाई का बोझ भी कम महसूस होता है," क्लोए ने बताया। "ग्रुप प्रोजेक्ट्स और कॉमन एरिया में बातचीत से हमें एक-दूसरे को समझने और मदद करने का मौका मिलता है।"