उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रक्षाबंधन के बाद पार्टी उम्मीदवार के नाम पर गंभीर मंथन शुरू करेगी। इस बार भाजपा को अपने प्रमुख सहयोगी दलों—तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और शिवसेना (शिंदे गुट)—का समर्थन सुनिश्चित हो चुका है। ऐसे में पार्टी की स्थिति चुनाव में बेहद मजबूत नजर आ रही है।
नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त, जल्दबाज़ी में नहीं भाजपा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चूंकि जीत में कोई संदेह नहीं है, इसलिए भाजपा उम्मीदवार के नाम की घोषणा को लेकर जल्दबाजी नहीं कर रही है। नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त है, जिससे पार्टी के पास रणनीति बनाने और विपक्ष से संवाद के लिए पर्याप्त समय है।
गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों को साधने की कोशिश
भाजपा की नजर अब गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों को साधने पर है, ताकि उम्मीदवार को अधिकतम सहमति मिल सके। इसके लिए पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को विपक्ष से संवाद की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है। दोनों वरिष्ठ नेता संभावित रूप से विपक्षी नेताओं से संपर्क साधेंगे और आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।
दो नामों पर प्रारंभिक चर्चा
पार्टी के भीतर अब तक दो नामों पर विचार हुआ है:
आचार्य देवव्रत – वर्तमान में गुजरात के राज्यपाल, और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं।
संतोष गंगवार – पूर्व केंद्रीय मंत्री और बरेली से कई बार सांसद रहे हैं। कुर्मी समाज से आते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें टिकट नहीं मिला था।
शिवसेना शिंदे गुट का सार्वजनिक समर्थन
बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना शिंदे गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की सार्वजनिक घोषणा कर दी। इससे भाजपा और अधिक आश्वस्त हो गई है कि सहयोगियों के समर्थन से बहुमत हासिल करने में कोई अड़चन नहीं आएगी।
विपक्षी गठबंधन बनाएगा रणनीति
विपक्ष भी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सक्रिय हो गया है। बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेता डिनर मीटिंग में एकजुटता दिखाने और साझा उम्मीदवार तय करने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। कांग्रेस की कोशिश है कि एक मजबूत विपक्षी चेहरा मैदान में उतार कर भाजपा को कड़ी टक्कर दी जाए।