अमेरिकी राष्ट्रपति ने कभी भारत की आजादी के लिए डाला था दबाव, जानिए कब और क्यों उठाई थी आवाज

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कभी भारत की आजादी के लिए डाला था दबाव, जानिए कब और क्यों उठाई थी आवाज

नई दिल्ली, 15 अगस्त – भारत आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज भले ही भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापारिक विवाद और टैरिफ की खटास नजर आ रही हो, लेकिन इतिहास में एक दौर ऐसा भी था जब अमेरिका ने भारत की आजादी की पैरवी की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल से भारत को स्वतंत्र करने की अपील की थी।

अटलांटिक चार्टर से बढ़ी उम्मीदें
1941 में रूजवेल्ट और चर्चिल ने ‘अटलांटिक चार्टर’ पर हस्ताक्षर किए, जिसमें युद्ध के बाद उपनिवेशों को स्वतंत्र करने का सिद्धांत शामिल था। भारत ने इस चार्टर के आधार पर आजादी की मांग तेज की, लेकिन चर्चिल ने स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता ब्रिटिश साम्राज्य पर लागू नहीं होगा।

रूजवेल्ट का ऐतिहासिक पत्र
न्यूयॉर्क स्थित हाइड पार्क लाइब्रेरी में संरक्षित दस्तावेजों में 25 फरवरी 1942 का एक पत्र सामने आया है, जिसमें रूजवेल्ट ने चर्चिल से भारत को आजादी देने पर विचार करने की बात कही थी। उन्होंने लिखा कि यदि जापान हमला करता है, तो स्वतंत्र भारत ब्रिटेन के साथ मिलकर पूरी ताकत से मुकाबला करेगा। हालांकि यह पत्र ‘नॉट सेंट’ यानी न भेजा गया चिह्नित था, लेकिन चर्चिल को इसकी भावना का अंदाजा था।

कैसाब्लांका सम्मेलन में भी उठी आवाज
1943 में कैसाब्लांका सम्मेलन के दौरान भी रूजवेल्ट ने भारत की स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि औपनिवेशिक शोषण अंततः युद्ध का कारण बनता है और भारत को तुरंत राष्ट्रमंडल का दर्जा देना चाहिए, ताकि आने वाले वर्षों में वह खुद तय कर सके कि साम्राज्य में रहना है या पूर्ण स्वतंत्र होना है।

नेहरू की पहल
जवाहरलाल नेहरू ने भी युद्ध से पहले रूजवेल्ट को पत्र लिखकर अमेरिकी समर्थन मांगा था। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत जापान के खतरे के बावजूद स्वतंत्रता की दिशा में अडिग रहेगा। रूजवेल्ट ने चर्चिल को समझाने की कोशिश की, लेकिन चर्चिल का जवाब था—“मैं ब्रिटेन का प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बना हूं कि ब्रिटिश साम्राज्य खत्म होते देखूं।”

मौजूदा हालात में रिश्तों में तनाव
आज की स्थिति में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा। ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीदकर रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। इस कदम से भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों का बड़ा बाजार है।

भारत और अमेरिका के संबंध समय-समय पर उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे हैं, लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि कभी व्हाइट हाउस से भी भारत की आजादी की आवाज बुलंद हुई थी।