दुनियाभर में नागरिकों की यात्रा स्वतंत्रता का आकलन करने वाले हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2025 की ताज़ा रिपोर्ट सामने आई है। इस वर्ष भी एशियाई देशों का दबदबा बना रहा है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देशों की रैंकिंग में गिरावट आई है। वहीं भारत ने भी इस बार मामूली सुधार के साथ अपनी स्थिति को थोड़ा बेहतर किया है।
सबसे ताकतवर पासपोर्ट: एशिया ने मारी बाजी
सिंगापुर एक बार फिर दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट लेकर शीर्ष स्थान पर कायम है। सिंगापुर के पासपोर्ट धारक अब 193 देशों में बिना वीजा के या वीजा ऑन अराइवल के साथ यात्रा कर सकते हैं।
जापान और दक्षिण कोरिया 190 देशों की वीजा-मुक्त पहुंच के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली और स्पेन संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं।
भारत की रैंकिंग में सुधार
भारत ने इस साल इंडेक्स में 80वां स्थान हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा बेहतर माना जा रहा है। भारतीय पासपोर्ट पर अब कुल 62 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है।
हालांकि भारत की तुलना में पड़ोसी देश बेहतर स्थिति में हैं – मालदीव 58वें, भूटान 87वें और श्रीलंका 94वें स्थान पर हैं। पाकिस्तान 103वें और अफगानिस्तान 104वें पायदान पर बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की रैंकिंग में गिरावट
ऑस्ट्रेलिया इस साल सातवें स्थान पर खिसक गया है, जबकि पिछले साल वह पांचवें स्थान पर था। अब ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट धारकों को 185 देशों में वीजा-मुक्त सुविधा मिलती है।
अमेरिका भी गिरावट के साथ 10वें स्थान पर आ गया है, और अब उसके पासपोर्ट पर 182 देशों में ही वीजा-मुक्त पहुंच है। ब्रिटेन को भी झटका लगा है और वह छठे स्थान पर चला गया है।
रैंकिंग कैसे तय होती है?
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा के आधार पर यह रैंकिंग तय करता है। यह केवल वीजा-मुक्त देशों की संख्या को आधार बनाता है, जबकि प्रवास, स्थायी निवास या नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
शीर्ष 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट 2025 में:
सिंगापुर – 193 देश
जापान, दक्षिण कोरिया – 190 देश
जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड – 189 देश
ऑस्ट्रिया, स्वीडन, पुर्तगाल, नॉर्वे, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स – 188 देश
ग्रीस, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड – 187 देश
ब्रिटेन – 186 देश
ऑस्ट्रेलिया, हंगरी, पोलैंड, माल्टा, चेक गणराज्य – 185 देश
यूएई, कनाडा, एस्टोनिया – 184 देश
क्रोएशिया, स्लोवेनिया, स्लोवाकिया, लातविया – 183 देश
अमेरिका, लिथुआनिया, आइसलैंड – 182 देश
विशेषज्ञों की राय
हेनली एंड पार्टनर्स के सीईओ डॉ. जुएर्ग स्टेफन ने कहा, "पासपोर्ट अब केवल यात्रा दस्तावेज़ नहीं रह गया है, यह किसी देश की कूटनीतिक ताकत और वैश्विक संबंधों का प्रतिबिंब है।"
उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे अमेरिका और ब्रिटेन जैसी शक्तियां भीतर की ओर झुक रही हैं, वैसे-वैसे उनके नागरिक वैकल्पिक नागरिकता और वैश्विक पहुंच की संभावनाएं तलाश रहे हैं।