ऑस्ट्रेलिया में एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन से जुड़ी दुर्लभ मौतों की गुत्थी सुलझी

वर्षों के शोध के बाद वैज्ञानिकों ने बताया—क्यों बने घातक रक्त के थक्के, क्या है नई खोज का महत्व

ऑस्ट्रेलिया में एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन से जुड़ी दुर्लभ मौतों की गुत्थी सुलझी

कैनबरा। कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया भर में इस्तेमाल की गई एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से जुड़े दुर्लभ लेकिन गंभीर दुष्प्रभावों पर ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण और विस्तृत खुलासा किया है। कई वर्षों तक चली वैज्ञानिक जांच, क्लिनिकल डेटा के विश्लेषण और प्रयोगशाला परीक्षणों के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने उन कारणों को समझ लिया है, जिनकी वजह से कुछ लोगों में घातक रक्त के थक्के बने और आठ ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की मृत्यु हुई।

क्या था मामला?

महामारी के शुरुआती दौर में जब टीकाकरण अभियान तेज़ी से चल रहा था, तब बहुत ही कम मामलों में कुछ लोगों में वैक्सीन लगने के बाद असामान्य रक्त के थक्के बनने की शिकायत सामने आई। इस स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में वैक्सीन-प्रेरित थ्रॉम्बोसिस विद थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (VITT) कहा जाता है।

इस सिंड्रोम में दो गंभीर स्थितियां एक साथ उत्पन्न होती हैं—

  • शरीर में असामान्य और खतरनाक स्थानों (जैसे मस्तिष्क या पेट की नसों) में रक्त के थक्के बनना

  • रक्त में प्लेटलेट्स (रक्त कण) की संख्या का कम हो जाना

ऑस्ट्रेलिया में लाखों लोगों को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन दी गई, लेकिन इनमें से अत्यंत दुर्लभ मामलों में यह जटिल प्रतिक्रिया देखने को मिली। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दुष्प्रभाव से जुड़े आठ लोगों की मृत्यु हुई थी।

शोध में क्या सामने आया?

ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने मरीजों के रक्त नमूनों, इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया और वैक्सीन के घटकों का गहन अध्ययन किया। नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, कुछ दुर्लभ मामलों में वैक्सीन के एक घटक के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली असामान्य प्रतिक्रिया देती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रतिक्रिया के दौरान शरीर विशेष प्रकार के एंटीबॉडी बना लेता है। ये एंटीबॉडी प्लेटलेट फैक्टर-4 (PF4) नामक प्रोटीन से जुड़कर प्लेटलेट्स को सक्रिय कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप रक्त के थक्के बनने लगते हैं, जबकि प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रतिक्रिया अत्यंत दुर्लभ थी और अधिकांश लोगों में ऐसा नहीं हुआ।

कितना था जोखिम?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुष्प्रभाव लाखों में कुछ मामलों तक सीमित था। महामारी के दौरान जब कोविड संक्रमण से गंभीर बीमारी और मृत्यु का खतरा बहुत अधिक था, तब वैक्सीन ने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई।

विशेषज्ञों ने दोहराया कि टीकाकरण से होने वाले लाभ, जोखिम की तुलना में कहीं अधिक थे। हालांकि, जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह त्रासदी बेहद दुखद रही।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही इस दुर्लभ दुष्प्रभाव की जानकारी सामने आई, टीकाकरण संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव किया गया। कुछ आयु वर्गों के लिए वैक्सीन की सिफारिशों को संशोधित किया गया और वैकल्पिक टीकों को प्राथमिकता दी गई।

सरकार ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पारदर्शिता और वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया है।

भविष्य के लिए क्या मायने?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भविष्य में वैक्सीन और दवाओं के विकास को और अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। अब शोधकर्ता ऐसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं की पहले से पहचान करने और उन्हें रोकने के तरीके विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

यह खोज केवल कोविड-19 टीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य वैक्सीन और चिकित्सा उपचारों की सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

महामारी ने चिकित्सा विज्ञान को नई चुनौतियां दीं, लेकिन इस तरह के शोध यह साबित करते हैं कि विज्ञान लगातार सीख रहा है और भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।