फिल्म निर्माण जोखिम भरा कारोबार, घाटा धोखाधड़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

फिल्म निर्माण जोखिम भरा कारोबार, घाटा धोखाधड़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 20 मार्च। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म उद्योग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि फिल्म बनाना स्वभावतः एक जोखिम भरा व्यवसाय है और किसी फिल्म के असफल होने या निवेश पर घाटा होने को अपने आप में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक फिल्म निर्माता के खिलाफ दर्ज आपराधिक धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि शुरुआत से ही आरोपी की नीयत धोखा देने की हो। केवल यह तथ्य कि बाद में निवेश की राशि वापस नहीं की गई, अपने आप में आपराधिक मंशा का प्रमाण नहीं है।

यह मामला एक फिल्म निर्माता द्वारा निवेशक से फिल्म निर्माण के लिए धन लेने से जुड़ा था। दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के अनुसार, निवेशक को फिल्म के मुनाफे में हिस्सा दिया जाना था। बाद में अतिरिक्त निवेश भी लिया गया और लाभ में हिस्सेदारी तय की गई।

फिल्म के निर्माण और रिलीज के बावजूद निवेशक को अपेक्षित राशि प्राप्त नहीं हुई। निर्माता द्वारा दिए गए पोस्टडेटेड चेक भी अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद निवेशक ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्म उद्योग में सफलता की कोई गारंटी नहीं होती और यदि फिल्म अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो निवेशक को नुकसान होना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों को आपराधिक रंग देना उचित नहीं है, जब तक कि स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी की मंशा साबित न हो।

शीर्ष अदालत ने इस फैसले के साथ मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व आदेश को पलट दिया और स्पष्ट किया कि व्यावसायिक असफलता को आपराधिक अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह निर्णय फिल्म उद्योग सहित अन्य जोखिम-आधारित व्यवसायों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।