नई दिल्ली, 20 मार्च।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भारत ने गहरी चिंता जताई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि एलपीजी सहित अन्य ईंधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि रूस में एलपीजी उपलब्ध होती है, तो वहां से भी खरीदारी की जाएगी।
प्रवक्ता ने पश्चिम एशिया के खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुओं तथा रिफाइनरियों पर हो रहे हमलों को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत न केवल नए आपूर्ति स्रोतों की तलाश की जा रही है, बल्कि मौजूदा भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में भारत द्वारा वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर रुख करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।